हिंदू धर्म: आखिर किसी शुभ काम के शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है? जानिए पौराणिक कथा

Feb 17, 2026 08:36 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' और 'प्रथम पूज्य' कहा जाता है। शुभ कार्यों में सबसे पहले इनका नाम लिया जाता है, ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। लेकिन इस परंपरा के पीछे एक गहरी पौराणिक कथा छिपी है।

हिंदू धर्म: आखिर किसी शुभ काम के शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है? जानिए पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा, विवाह, गृहप्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' और 'प्रथम पूज्य' कहा जाता है। शुभ कार्यों में सबसे पहले इनका नाम लिया जाता है, ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। लेकिन इस परंपरा के पीछे एक गहरी पौराणिक कथा छिपी है। शिव पुराण और अन्य पुराणों में वर्णित इस कथा से पता चलता है कि गणेश जी को प्रथम पूज्य का दर्जा कैसे प्राप्त हुआ। आइए जानते हैं इस कथा और महत्व को।

देवताओं में छिड़ा श्रेष्ठता का विवाद

शिव पुराण और गणेश पुराण में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार सभी देवताओं के बीच यह विवाद छिड़ गया कि धरती पर सबसे पहले किसकी पूजा होनी चाहिए। इंद्र स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मानते थे, कार्तिकेय अपनी शक्ति का दावा करते थे, विष्णु अपनी सर्वव्यापकता बताते थे और इसी तरह हर देवता अपने को प्रथम पूज्य मान रहा था। जब विवाद बढ़ता गया और कोई समाधान नहीं निकला, तो सभी देवता भगवान शिव और माता पार्वती के पास न्याय के लिए पहुंचे।

महादेव ने आयोजित की अनोखी प्रतियोगिता

भगवान शिव ने विवाद सुलझाने के लिए एक प्रतियोगिता की घोषणा की। उन्होंने कहा - 'जो देवता अपने वाहन पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके सबसे पहले लौटेगा, वही जगत में प्रथम पूज्य का स्थान प्राप्त करेगा।' यह सुनते ही सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। इंद्र ऐरावत पर, कार्तिकेय मयूर पर और अन्य देवता अपने वाहनों पर।

गणेश जी की बुद्धिमानी और भक्ति

गणेश जी का वाहन छोटा सा मूषक यानी चूहा था। ब्रह्मांड की परिक्रमा करना उनके लिए असंभव था। लेकिन गणेश जी ने अपनी बुद्धि और भक्ति का परिचय दिया। उन्होंने माता-पिता शिव-पार्वती के चारों ओर सात बार परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। जब सभी देवता थक-हारकर लौटे, तो गणेश जी को पहले से ही वहां मौजूद पाया।

शिव-पार्वती के चरणों में समाहित है समस्त ब्रह्मांड

सभी देवताओं ने आश्चर्य से पूछा कि गणेश जी ने यह कैसे कर दिखाया? तब गणेश जी ने बहुत ही सुंदर तर्क दिया, 'माता-पिता के चरणों में ही समस्त ब्रह्मांड समाहित है। तीनों लोक, सात द्वीप, सात समुद्र, नौ ग्रह - सब कुछ माता-पिता के चरणों में ही हैं। इसलिए मैंने माता-पिता की परिक्रमा करके ही ब्रह्मांड की परिक्रमा पूरी कर ली।'

प्रथम पूज्य का वरदान और विघ्नहर्ता का दर्जा

यह सुनकर भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने गणेश जी को वरदान दिया कि 'आज से तुम जगत में प्रथम पूज्य होगे। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में तुम्हारी पूजा अनिवार्य होगी। अगर कोई ऐसा नहीं करेगा, तो उसका कार्य विघ्नों से भरा रहेगा।' तभी से गणेश जी 'विघ्नहर्ता' और 'प्रथम पूज्य' कहलाए।

यह कथा हमें सिखाती है कि बुद्धि और भक्ति से कोई भी असंभव कार्य संभव हो जाता है। इसलिए आज भी हर मांगलिक कार्य से पहले गणेश पूजा अनिवार्य है। चाहे विवाह का कार्ड हो या नया व्यवसाय शुरू करना - सबसे पहले 'ॐ गणेशाय नमः' का उच्चारण इसलिए किया जाता है ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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