Meethi Eid 2026: ईद उल-फितर का दूसरा नाम मीठी ईद क्यों है? खास है शव्वाल का महीना, इस दिन से होगा शुरु

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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ईद का जश्न अबसे कुछ ही दिन में मनाया जाएगा। इसी हफ्ते नया चांद दिखने के अगले दिन ही ईद उल-फितर का जश्न होगा लेकिन कभी आपने सोचा है कि इस त्योहार का मीठी ईद क्यों कहा जाता है?

Meethi Eid 2026: ईद उल-फितर का दूसरा नाम मीठी ईद क्यों है? खास है शव्वाल का महीना, इस दिन से होगा शुरु

Meethi Eid 2026: कुछ त्योहार ऐसे हैं जिनकी तारीख को लेकर काफी कन्फ्यूजन होता है। ईद भी इनमें से ही एक है। इस्लामिक कैलेंडर में ये खास पर्वों में से एक है। ईद का जश्न तभी मनाया जाता है जब एक रात पहले नया चांद दिख जाता है। इस बार भी ईद की तारीख को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन है। वहीं कई लोग ईद के नाम को लेकर कन्फ्यूज होते हैं। दरअसल ईद को ईद उल-फितर और मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि ये अलग-अलग त्योहार के नाम है। बता दें कि ये तीनों एक ही त्योहार है और आज जानेंगे कि आखिर ईद उल-फितर को मीठी ईद भी क्यों कहा जाता है। साथ ही जानेंगे कि भारत में ईद कब मनाए जाने की संभावना है और शव्वाल का महीना कबसे शुरु होता है?

मीठी ईद का मतलब?

रमजान के महीने का आखिरी हफ्ता शुरू हो चुका है और इसी के साथ हर जगह ईद को लेकर उत्साह भी शुरु हो चुका है। ईद की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरु हो जाती हैं। रमजान खत्म होते ही ईद उल-फितर मनाई जाती है और लोग अपनों के साथ मिलकर लजीज खाने और मिठाइयों का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं। इस दौरान सेंटर ऑफ अट्रैक्शन सेवइयां और शीर खुरमा होती है। इस त्योहार में इतनी मिठाइयां होती है और इसी वजह से लोग इसे मीठी ईद भी कहते हैं। इस खास दिन लोग अपनों से मिलने जाते हैं और गले लगकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं।

भारत में कब मनाई जाएगी ईद?

एस्ट्रोनॉमिक सेंटर की ओर से बताया जा रहा है कि जिन देशों में लोगों ने 19 फरवरी से रोजा रखना शुरु किया था, वहीं पर 20 मार्च को ईद का जश्न मनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उम्मीद है कि भारत में नया चांद 19 मार्च को दिख जाएगा। अगर 19 मार्च को नया चांद दिख जाए तो अगले दिन यानी 20 मार्च को ईद मनाई जा सकती है। अगर नया चांद 19 को नहीं दिखेगा तो यही माना जाएगा कि ईद 21 मार्च को है।

कब शुरु होता है शव्वाल का महीना

रमजान का पवित्र महीना खत्म होते ही शव्वाल का महीना शुरु होता है। ईद उल-फितर के जश्न के साथ ही शव्वाल के महीने की शुरुआत होती है। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से ये 10वां महीना होता है। इस्लामिक कम्युनिटी में ये महीना बेहद ही खास होता है। दरअसल इस महीने में 6 रोजे रखे जाते हैं जिन्हें साल भर के रोजे जितना फलदायी माना जाता है।

ईद उल-फितर की शुरुआत

ईद उल-फितर का संबंध पैगंबर मुहम्मद से है। इस त्योहार की शुरुआत उन्होंने मक्का छोड़ने का बाद महीना में की थी। इसे रमजान के अंत के रुप में देखा जाता है। रमजान के महीने के बाद ही इस त्योहार को मनाया जाता है।

रमजान का महीना है खास

मुस्लिम कम्युनिटी में रमजान का महीना सबसे पाक यानी पवित्र माना जाता है। रमजान के महीने में लोग आत्म चिंतन करते हैं और इस दौरान खानपान के साथ-साथ कई तरह की चीजों से परहेज करने का रिवाज है। एक तरह से इस त्योहार को आध्यात्मिक शुद्धि के रूप में देखा जाता है।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
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