
क्या सच में 72 साल पर बदल जाती है मकर संक्रांति की तारीख? जानिए इसके बारे में सबकुछ
प्रचलित मान्यता है कि हर 72 साल बाद मकर संक्रांति की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो जाती है। लोग कहते हैं कि पहले यह 13-14 जनवरी को होती थी, अब 14-15 पर है और भविष्य में 15-16 पर आ जाएगी। क्या यह बात पूरी तरह सही है?
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर मनाया जाता है। इस दिन गुड़, तिल, रेवड़ी और खिचड़ी का प्रसाद बनाकर सूर्य देव की उपासना की जाती है। लेकिन एक बहुत प्रचलित मान्यता है कि हर 72 साल बाद मकर संक्रांति की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो जाती है। लोग कहते हैं कि पहले यह 13-14 जनवरी को होती थी, अब 14-15 पर है और भविष्य में 15-16 पर आ जाएगी। क्या यह बात पूरी तरह सही है? ज्योतिष गणित और खगोल विज्ञान के आधार पर देखें तो यह बदलाव सूर्य की गति और पृथ्वी की अक्षीय घूर्णन (Precession of Equinoxes) के कारण होता है। आइए विस्तार से समझते हैं इसकी सच्चाई।
मकर संक्रांति की तारीख बदलने का रहस्य
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर तय होती है। सूर्य एक वर्ष में 12 राशियों का चक्कर पूरा करता है, जो लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है। लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर में 365 दिन होते हैं। इस 6 घंटे के अंतर को लीप ईयर में हर 4 साल बाद एक दिन जोड़कर एडजस्ट किया जाता है। लेकिन सूर्य की गति पूरी तरह एक समान नहीं रहती है। कभी तेज, कभी धीमी। इसी कारण मकर संक्रांति की तारीख 14 या 15 जनवरी के आसपास रहती है। कभी 13 जनवरी से पहले या 16 जनवरी के बाद नहीं जाती है। यह बदलाव सूर्य की वास्तविक स्थिति और कैलेंडर के तालमेल के कारण होता है।
72 साल का चक्र कैसे काम करता है?
ज्योतिष गणित के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में गोचर हर साल लगभग 20 सेकंड की देरी से होता है। हर 3 साल में यह देरी 1 घंटे की हो जाती है। इस तरह 72 साल में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश में एक दिन की देरी हो जाती है। यह चक्र पृथ्वी की अक्षीय घूर्णन (Precession of Equinoxes) के कारण है, जो tropical zodiac को 1° हर 72 साल में शिफ्ट करता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति की तिथि धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। अगर हम आकलन करें, तो हजार साल पहले मकर संक्रांति 1 जनवरी को मनाई जाती थी। आने वाले 5000 साल बाद यह फरवरी के आखिर में मनाई जाएगी। फिलहाल 2077 तक यह 14 या 15 जनवरी को ही रहेगी।
ऐतिहासिक तारीखों में बदलाव
ऐतिहासिक प्रमाणों से पता चलता है कि मकर संक्रांति की तिथि समय के साथ बदलती रही है। राजा हर्षवर्धन (606-647 ई.) के समय यह 24 दिसंबर को मनाई जाती थी। मुगल शासक अकबर (1542-1605 ई.) के काल में 10 जनवरी को थी। शिवाजी (1630-1680 ई.) के जीवनकाल में 11 जनवरी को पड़ती थी। 18वीं सदी में 12 या 13 जनवरी को मनाई जाती थी। 1902 से अब तक यह 14 या 15 जनवरी को ही रही है। यह बदलाव सूर्य की साइडरियल गति (365.256 दिन) और ग्रेगोरियन कैलेंडर (365.2425 दिन) के अंतर से होता है। हर 72 साल में लगभग 1 दिन का शिफ्ट आता है, लेकिन यह हमेशा आगे की ओर नहीं, बल्कि कैलेंडर एडजस्टमेंट पर निर्भर करता है।
उत्तरायण और मकर संक्रांति का अंतर
उत्तरायण और मकर संक्रांति में अंतर है। उत्तरायण खगोल विज्ञान से जुड़ा है - जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ना शुरू करता है। यह 21 दिसंबर को होता है। लेकिन मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर मनाई जाती है, जो साइडरियल गणना से तय होती है। पुराने समय में दोनों लगभग एक ही समय (21-22 दिसंबर) पर होते थे, लेकिन प्रिसेशन ऑफ इक्विनॉक्स के कारण अब अंतर आ गया है। इसलिए उत्तरायण 21 दिसंबर को है, लेकिन मकर संक्रांति 14-15 जनवरी को मनाते हैं। यह चक्र जारी रहेगा और तारीखें धीरे-धीरे शिफ्ट होंगी।
मकर संक्रांति की तारीख में 72 साल का चक्र सच्चाई है, लेकिन यह पूर्ण रूप से तय नहीं है। सूर्य की गति और कैलेंडर के कारण यह बदलाव होता है। पर्व मनाने के लिए पंचांग देखें और सूर्य देव की पूजा करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





