क्यों डोलने लगा इंद्र का सिंहासन, मथुरा के नाग बिहारी का मंदिर से क्या संबंध, कालसर्पदोष की होती है पूजा

लाइव हिन्दुस्तान, मथुरा, हिन्दुस्तान संवाद
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Nag Bihari temple: मथुरा का नाग बिहारी मंदिर बहुत खास है। नाग पंचमी पर यहां कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए पूजा होती है। आइए जानें क्यों इंद्र से इसका संबंध है।

Nag Panchami 17 August
नाग पंचमी 17 अगस्त

ब्रजभूमि में नाग पंचमी पर नाग पूजा का विशेष महत्व है। यहां पुराने शहर के कम्पू घाट पर प्राचीन नाग टीला है, जहां पूजन करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। पंरतु, देखरेख के अभाव में यह टीला अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। शासन-प्रशासन ने आज तक इस टीले के विकास और इसके सौंदर्यकरण की कोई योजना तक नहीं बनायी। वैसे भी ब्रज में जैंत स्थित जयकुंड पर भी नाग मंदिर है, जिसका इतिहास भगवान श्रीकृष्ण की नाग मर्दन लीला से जुड़ा है।

धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि राजा परिक्षित को अर्जून के पौत्र थे। वे अभिमन्यू और उत्तरा के बेचे थेष एक दिन वो शिकार के लिए भटक रहे तो ऋषि शमिक के आश्रम में जा पहुंचे। ऋषि साधना में लीन थे, राजा उनसे पानी मांगते हैं लेकिन समाधि में लीन होने के कारण वो कोई उत्तर नहीं देते। तभी राजा एक मरे हुए सांप को ऋषि के गले में डाल देते है और वह से चला जाता है। ऋषि शमिक के पुत्र शृंगी को जब ये पता चलता है राजा ने उसके पिता का तिरस्कार किया है तो वह राजा को श्राप दे देता है जिसमें उसकी मृत्यु 7 दिन बाद तक्षक सर्प के काटने से हो जाएगी। उनके बेटे राजा जनमेजय इससे क्रोधित होकर कुरुक्षेत्र में जनमेजय ने यज्ञ किया। जब तक्षक नहीं मिला तो मंत्रों से सर्पों को भस्म करना शुरू कर दिया। तक्षक जान बचाने को भगवान इंद्र के¨सिंहासन से लिपट गए।

मंत्रों के प्रभाव के कारण इंद्र का सिंहासन भी डोलने लगा। इस पर सभी देवता एकत्रित हुए। ब्रह्माजी ने जनमेजय से कहा कि यह क्या कर रहे हो। तुम्हारे पिता को श्राप था। जब राजा जनमेजय को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने मथुरा के नाग टीला पर सर्प दोष निवारण यज्ञ कराया। इस टीले पर नाग बिहारी का मंदिर है। इस टीले पर पूजन करने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। नाग पंचमी को यहां पूजन करने का विशेष महत्व है। परंतु, पौराणिक महत्व का टीला अपने अस्तित्व से जूझ रहा है।

इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित ग्राम जैंत की पौराणिक लीलास्थली जयकुंड नवनिर्मित नाग मंदिर है। इस मंदिर का भी द्वापरयुगीन महत्व है। यहां नागराज की विशाल आकृति है। कहा जाता है कि यह आकृति जमीन में कितनी गहराई तक इसका आज तक कोई पता नहीं लगा सका। यहां भी नाग पंचमी पर विशेष मेले का आयोजन होता है। बताते चलें कि द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में कालिया नाग का मर्दन किया था। मान्यता है कि यही वजह है कि ब्रज में नाग पूजन का विशेष महत्व है।

Nag Panchami 2026:
Anuradha Pandey

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Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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