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Mahashivratri 2026: भगवान शिव को दूध, शहद और बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता हैं? जानिए इसके लाभ

Mahashivratri 2026: भगवान शिव को दूध, शहद और बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता हैं? जानिए इसके लाभ

संक्षेप:

मान्यता है कि इन तीनों को एकसाथ चढ़ाने से साधक के जीवन में तमाम संकट खत्म होते हैं। धन, वैभव, ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। साथ ही मन की शांति मिलती है। तीनों को एकसाथ चढ़ाने पर रिश्तों में सुधार होता है।

Feb 11, 2026 04:14 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को है। इस दिन शिव भक्त शिवालयों में जाकर भगवान शिव को दूध, शहद और बेलपत्र समेत कई चीजें अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इन चीजों को अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। ये चीजें सिर्फ महाशिवरात्रि पर ही नहीं, बल्कि सोमवार, प्रदोष और सावन माह में शिव जी को अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव को दूध, शहद और बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है? ज्योतिष के अनुसार इन चीजों का संबंध ग्रहों और उनकी ऊर्जा से माना जाता है। चलिए इसके पीछे की धार्मिक और ज्योतिष वजह जानते हैं। साथ ही इससे अर्पित करने के लाभ भी जानेंगे।

दूध क्यों चढ़ाते हैं?
शिव भक्त महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग पर दूध अर्पित करते हैं। ज्योतिष के मुताबिक दूध का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, जिसे मन, भावनाओं, प्रेम और शांति का प्रतीक माना जाता है। जो लोग तनाव, चिंता, नींद की परेशानी या मन की अशांति जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें यह उपाय करने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष के अनुसार दूध चढ़ाने से चंद्रमा की ऊर्जा शांत और संतुलित होती है। दूध चढ़ाने के लिए चांदी के पात्र का इस्तेमाल करें। चांदी का लोटा न हो तो मिट्टी के कलश से दूध चढ़ा सकते हैं।

दूध चढ़ाने के लाभ
- शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से चंद्र ग्रह मजबूत होता है।
- मन शांत और स्थिर रहता है।
- भावनाओं में संतुलन आता है।

शहद चढ़ाने की वजह
शिवलिंग पर जल, दूध, दही के अलावा शहद भी चढ़ाया जाता है। शहद को शुद्धता और मिठास का प्रतीक माना जाता है। इसे अभिषेक में इस्तेमाल किया जाता है। ज्योतिष में शहद का संबंध शुक्र ग्रह से है। शुक्र ग्रह प्रेम, सुंदरता, सुख-सुविधा और रिश्तों का प्रतीक है।

ऐसा माना जाता है कि शहद चढ़ाने से रिश्ते बेहतर होते हैं, दांपत्य जीवन में मिठास आती है और जीवन में सुख-शांति बढ़ती है।

शहद चढ़ाने के लाभ
- शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करने पर शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
- साथ ही इसे अर्पित करने प्रेम और रचनात्मकता बढ़ती है।
- जीवन में खुशहाली और आनंद आता है।
- आर्थिक उन्नति होती है।
- वैवाहिक जीवन सुखद रहता है।

बेल पत्र क्यों चढ़ाते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय हैं। पूजा में इसका विशेष महत्व है। ज्योतिष में बेल के पेड़ को गुरु (बृहस्पति) ग्रह से जोड़ा जाता है। गुरु ग्रह ज्ञान, आशीर्वाद, आध्यात्मिकता और विकास का प्रतीक है। बेलपत्र की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) का प्रतीक मानी जाती हैं। ये तीन गुणों, सत्त्व, रज और तमका भी संकेत देती हैं, जो जीवन में संतुलन बनाए रखते हैं। ऐसे में बेलपत्र चढ़ाने से साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव होते हैं। मान्यतानुसार शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।

बेलपत्र चढ़ाने केलाभ
- शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से गुरु ग्रह मजबूत होता है
- ज्ञान और समझ बढ़ती है।
- जीवन में सुख और समृद्धि बढ़ती है।

एकसाथ चढ़ाने के लाभ
तीनों एक साथ चढ़ाने का भी अलग महत्व होता है। मान्यता है कि इन तीनों को एकसाथ चढ़ाने से साधक के जीवन में तमाम संकट खत्म होते हैं। धन, वैभव, ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। साथ ही मन की शांति मिलती है। तीनों को एकसाथ चढ़ाने पर रिश्तों में सुधार होता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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वास्तु शास्त्र
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