जगन्नाथ रथ यात्रा: कौन हैं राजा इन्द्रद्युम्न जिनके सपने में आए थे विष्णु भगवान और प्रतिमा बनाने के लिए कहा

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Jagannath rath yatra 2026: जगन्नाथ जी की मूर्ति कैसे बनी? किस राजा के सपने में आए थे विष्णु भगवान और उन्होंने क्या कहा?

जगन्नाथ रथ यात्रा

आज से विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू हो रही है। जगन्नाथ भगवान अकेले ऐसे भगवान है जो अपने भक्तों को दर्शन देने जाते हैं। उनका मूल स्वरूप मंदिर से रथ में गुड़िचा मंदिर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर जगन्नाथ मंदिर में जग्ननाथ जी, बलराम और सुभद्रा की यह मूर्ति कैसे आईं और किस राजा ने इनको बनवाया। इस कथा का उल्लेख पुराणों में मिलता है। कैसे श्रीहरि राजा के सपनों में आए और उन्होंने बताया कि जगन्नाथ की मूर्ति कैसे बनेगी। यहां आप इसे पढ़ सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में भगवान्‌ विष्णु के परम भक्त थे राजा इन्द्रद्युम्न। उन्हें श्रीहरि ने वर दिया था कि मैं तुम्हारे तीर्थ के किनारे निवास करूंगा। ऐसा कहा जाता है कि उनके सपने में खुद श्रीहरि आए ।

राजा को सपने में क्या दिखा?

एक रोज राजा भगवान विष्णु के दर्शन की सोच रात को चिन्तामग्र हो पृथ्वी पर कुश और वस्त्र बिछाकर सो गए। उनके सो जाने पर भगवान ने उन्हें दर्शन दिए। देवाधिदेव जगदगुरु भगवान्‌ वासुदेव राजा के सपने में आए। वे शंख, चक्र और गदा धारण किए हुए थे। राजा ने भगवान्‌ का दर्शन किया। वे धनुष और बाण भी धारण कर रखे थे। उनका रंग नीले पु्खराज की तरह था। वे गरुड़ के कंधो पर विराजमान थे। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूं। तुम मेरी प्रतिमा बनवाओं इसके लिए तुम समुद्र में जाना वहां तुम्हें एक बड़ा वृक्ष दिखाई देगा। उस वृक्ष का आधा भाग जल में है और आधा भाग जमीन पर वह समुद्र की लहरों से भी हिलता है। तुम सुबह हाथ में कुल्हाड़ी लेकर जाना और से पहचानकर उसमें एक खास चीज दिखाई देगी, जिससे तुम प्रतिमा बनवाना। सपने के बाद सुबह जब राजा की नींद खुली तो राजा समुद्र में गया। वहां उसे महावृक्ष मिला। राजा ने कुल्हाड़ी से उसे काटा तो उसमें से प्रकाश पुंज दिखाई दिया। इसके बाद देवशिल्पी विश्वकर्मा को राजा ने भगवान का स्वरुप बताया और मूर्ति तैयार हुई।

जगन्नाथ रथ यात्रा में क्यों शामिल होते हैं लाखों भक्त?

ऐसा कहा जाता है कि जो इस रथ की रस्सी को खींचता है वो वह बैकुंठ धाम में निवास करते हैं। जो भगवान के आगे रहकर उनके मुखार विन्द का दर्शन करते और मार्ग की धूल या कीचड़ में प्रणाम करते हैं, श्रीविष्णु के उत्तम धाम में जाते हैं। इसलिए भगवान के साक्षात दर्शन के लिए लाखों लोग इस रथयात्रा में शामिल होते हैं।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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