Nag Panchami 2026 Puja: कौन हैं सांपों की अधिष्ठात्री देवी, भगवान शिव से है खास नाता, नाग पंचमी पर दर्शन

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किन्हें सांपों की अष्ठधात्री देवी कहा जाता है। जिनके नाग पंचमी पर दर्शन किए जाते हैं। इनका भगवान शिव से भी खास नाता माना जाता है। आइए जानें इनके बारे में

Nag panchami Puja on devi Mansa
कौन हैं सांपों की अधिष्ठात्री देवी

माता मनसा देवी को भी सांपों की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ज्योतिषचार्य राहुल अग्रवाल के अनुसार इस बार 17 अगस्त को नाग पंचमी और सोमवार के होने से जहां बहुत ही महत्वपूर्ण योग बन रहा है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव का जल अभिषेक करने से और नाग देवता के पूजन आदि करने से जीवन में सुख संपन्निता आदि बनी रहती है। इस दिन मनसा देवी की विशेष पूजा की जाती है। मनसा देवी का मंदिर प्रमुख हरिद्वार में है। इस दिन यहां खास तौर पर पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन लोग इनकी सर्पदंश और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए पूजा करते हैं। कहीं कहीं मनसा देवी को नागों की माता कहा जाता है। कहा जाता है कि ये सर्पदंश से रक्षा करने वाली और संतान-सुख देती हैं। इन्हें पद्मा या विषहरी नामों से भी जाना जाता है। इनको विषहरि इसलिए कहा जाता है क्योंकि देवी सांपों के विष से रक्षा करती हैं। भारत में सांपों की संख्या भी अधिक है, इसलिए इनकी पूजा का महत्व भी बढ़ा है। ये भगवान् शिव की पुत्री हैं, लेकिन शिव परिवार की तरह इनकी पूजा नहीं होती है। इन्हें सिर्फ सुरक्षा और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है।

नाग देवता को क्या अर्पित करें

ज्योतिषचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पूजा का यह पर्व मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्या रुचि कपूर के अनुसार इस दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। पूजा सामग्री कच्चा दूध, नाग देवता की तस्वीर या मूर्ति, कपूर, चंदन, कुमकुम, अक्षत और सफेद फूल लेकर पूजा करें।

नाग पंचमी पर पूजन मुहूर्त

अमृत योग सुबह 05:50 से 07:29, शुभ योग सुबह 09:08 से 10:46 बजे, लाभामृत योग दोपहर 03:42 से शाम 06:59 बजे, अभिजित योग 11:58 से 12:51 बजे तक।

नाग पंचमी पर शुभ योग

श्रावण मास के तीसरे सोमवार यानी आज नागपंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। नाग पंचमी सोमवार के दिन पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषविदों के अनुसार, आज सूर्योदय के समय चित्रा नक्षत्र, बालव करण, बुधादित्य योग और शुभ योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस महासंयोग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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