रत्नशास्त्र: कौन पहन सकता है सफेद पुखराज? दूर होंगी 2 दिक्कतें, जानें पहनने का सही तरीका
White Sapphire Gemstone: रत्नशास्त्र के अनुसार सफेद पुखराज को शुक्र ग्रह से जुड़ा शुभ रत्न माना जाता है। जानें किन राशियों के लिए ये शुभ माना जाता है?

रत्न और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सफेद पुखराज शुक्र ग्रह से जुड़ा रत्न माना जाता है। शुक्र को लव लाइफ, शादी, लग्जरी और कला का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता होती है कि जिन लोगों का शुक्र कमजोर होता है उन्हें अपने रिश्ते और शादीशुदा जिंदगी में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं सुख-सुविधाओं में भी कमी रहती है। साथ ही पैसों से जुड़ी हर एक चीज में कोई ना कोई बाधा जरूर आती है। ऐसे लोगों के लिए सफेद पुखराज शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं किन लोगों को यह रत्न पहनना चाहिए और इसे धारण करने का सही तरीका क्या है?
इन लोगों को सूट करेगा सफेद पुखराज
1. ज्योतिष और रत्न शास्त्र के अनुसार सफेद पुखराज की एनर्जी पावरफुल है। ऐसे में अगर गलत तरीके या गलत राशि के लोग इसे पहनेंगे तो ये उलटा असर भी डाल सकती है। शास्त्र के हिसाब से वृषभ और तुला राशि के लोगों के लिए सफेद पुखराज काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है। इससे जिंदगी में सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं और रिश्तों में सुधार देखने को मिलता है।
2. शास्त्र के हिसाब से क्रिएटिव क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी सफेद पुखराज खूब सूट करेगा। राइटर से लेकर सिंगर और एक्टर और फैशन डिजाइनर के लिए ये रत्न काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। मान्यता है कि सफेद पुखराज की मदद से टैलेंट को निखारने में मदद मिलती है।
सफेद पुखराज से दूर होंगी 2 दिक्कतें
रत्नशास्त्र के अनुसार सफेद पुखराज लव लाइफ और शादीशुदा जिंदगी से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में मदद सकता है। जिन लोगों की शादी में देरी हो रही है या फिर रिश्ते में तनाव बना हुआ है उनके लिए ये रत्न किसी चमत्कार से कम नहीं होता है। वहीं जिन लोगों को कॉन्फिडेंस में कमी महसूस होती है उनके लिए भी ये रत्न शुभ माना जाता है।
पहनने का सही तरीका
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सफेद पुखराज को शुक्रवार के दिन पहनना अच्छा माना जाता है। नियम के अनुसार इसे हमेशा चांदी और व्हाइट गोल्ड में जड़वाना ही शुभ माना जाता है। इसके अलावा प्लैटिनम में भी इसे जड़वा सकते हैं। इसे दाएं हाथ में अनामिका उंगली में पहनना सबसे अच्छा माना जाता है। बस इसे धारण करने से पहले गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्धीकरण कर लें। इसके बाद ॐ शुक्राय नमः मंत्र का 108 बार जाप करके इसे धारण कर लें। हालांकि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले एक बार आप जानकार ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरूर दिखा दें।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
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