
महिलाओं को किस पैर की उंगली में पहननी चाहिए बिछिया? जानिए नियम व फायदे
हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाओं के लिए कई परंपराएं हैं। शादी के बाद लड़की को माथे पर बिंदी, मंगलसूत्र, मांग टीका, झुमके जैसी चीजें पहनना धार्मिक दृष्टि से अहम माना जाता है। साथ वो अपने पैरों में बिछिया भी पहनती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महिलाएं बिछिया क्यों पहनती हैं और इसके लाभ क्या है?
हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाओं के लिए कई परंपराएं हैं। शादी के बाद लड़की को माथे पर बिंदी, मंगलसूत्र, मांग टीका, झुमके जैसी चीजें पहनना धार्मिक दृष्टि से अहम माना जाता है। साथ वो अपने पैरों में बिछिया भी पहनती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शादी के बाद महिलाएं बिछिया क्यों पहनती हैं और इसके लाभ क्या है? ऐसी मान्यता है कि बिछिया यदि सही ढंग से ना पहना जाए, तो वह परेशानी की वजह बन सकता है। चलिए इसके पहनने के नियम और फायदे जानते हैं।
चंद्रमा का प्रतीक
ज्योतिषियों के मुताबिक शादी के बाद महिलाओं को चांदी की बिछिया पहनना सबसे शुभ माना जाता है। क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिछिया चंद्रमा का प्रतीक है। इसलिए विवाहित महिलाओं को हमेशा चांदी का बिछिया पहनने की सलाह दी जाती है जिससे चंद्रमा की कृपा प्राप्त हो सके। ऐसा माना जाता है कि यह महिलाओं को शीतलता प्रदान करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है।
कितनी बिछिया पहनें
कई महिलाएं पैरों की सभी उंगलियों में बिछिया पहन लेती हैं। कुछ महिलाएं तो कम से कम 2 या 3 उंगलियों में धारण करती हैं जबकि हिन्दू धर्म के अनुसार, सुहागिन महिलओं को बिछिया सिर्फ एक ही उंगली में ही पहननी चाहिए।
किस उंगली में पहनें
धार्मिक मान्यतानुसार, विवाहित महिलाओं को बिछिया दाहिने और बाएं पैर की दूसरी उंगुली में पहनना चाहिए। मान्यता है कि चांदी की पायल और बिछिया लक्ष्मी का वाहक होते हैं। इसलिए इनका खोना शुभ संकेत नहीं होता। इसके अलावा इन्हें किसी और को उतार कर नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से आपके पति बीमार पड़ सकते हैं। आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है।
साइंस क्या कहता है?
पैर में अंगूठे के ठीक बाद की उंगली में बिछिया के पीछे साइंस भी है। पैर की दूसरी उंगली से होकर नर्व सीधे यूट्रस से जुड़ी होती है। इस उंगली में बिछिया पहनने से महिलाओं के यूटरस तक ब्लड सही रहता है। साथ ही इससे महिलाओं का पीरियड्स भी रेगुलेट रहता है और सही व आता है। जिसकी वजह से महिलाओं के रिप्रप्रोडक्टिव अंग हेल्दी बने रहते हैं।
कब बदलें
वैवाहिक जीवन में किसी भी चीज को पुरानी या टूटी पहनना अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे में जब बिछिया पुरानी या टूट जाती है तो उसे बदल दिया जाता है क्योंकि, यदि आप इसे बदलते नहीं हैं तो इसके अशुभ परिणाम आपको दिखाई देने लगते हैं।
- अमावस्या, पूर्णिमा, वट सावित्री, अक्षय तृतीया, नवरात्रि और करवा चौथ जैसे अवसर पर बिछिया को बदलना शुभ माना गया है।
- इन तिथियों पर आप सिर्फ बिछिया ही नहीं किसी भी प्रकार के आभूषण को बदल सकते हैं या पहन सकते हैं।
- इसके अलावा बिछिया बदलने के लिए रविवार का दिन शुभ माना गया है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





