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किस धातु में पहननी चाहिए कछुए वाली रिंग, जानिए नियम और फायदे

किस धातु में पहननी चाहिए कछुए वाली रिंग, जानिए नियम और फायदे

संक्षेप:

हिंदू धर्म में कछुएका खास महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार यानि कछुए के रूप में अवतार लिया था। वहीं भगवान विष्णु की संगिनी देवी लक्ष्मी हैं, जिन्हें धन और समृद्धि की देवी कहा जाता है। ऐसे में कछुए की अंगूठी धारण करने से दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Jan 16, 2026 04:55 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में कई ऐसी चीजों का जिक्र मिलता है, जो हमारे जीवन पर गहरा असर होता हैं। इन्हीं में से एक है कछुए की अंगूठी हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के इस पहनना काफी शुभ फलदायी होता है। इसे पहनने से ना व्यापार में तरक्की होती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कछुए की अंगूठी किस धातु की पहननी चाहिए। क्योंकि इसे धारण करने के नियम होते हैं। यदि इसे गलत तरीके से धारण किया जाए, तो अशुभ परिणाम मिल सकते हैं।

हिंदू धर्म में कछुए का खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार यानि कछुए के रूप में अवतार लिया था। वहीं भगवान विष्णु की संगिनी देवी लक्ष्मी हैं, जिन्हें धन और समृद्धि की देवी कहा जाता है। ऐसे में कछुए की अंगूठी धारण करने से दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सफलता का प्रतीक
कछुआ स्थिरता, धैर्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इससे पहनने से जीवन में धीरे-धीरे तरक्की होती है। वास्तु के अनुसार चांदी या पंचधातु में कछुए की अंगूठी पहनना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।

पहनने की विधि
- कछुए की अंगूठी को शुक्रवार या शनिवार के दिन पहनना अच्छा माना जाता है।

- पहनने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध में कुछ देर रखकर शुद्ध कर लें।

- अंगूठी को दाहिने हाथ की मध्यम (मिडिल) उंगली में पहना जाता है।

- कछुए की अंगूठी पहनते समय “ॐ कुरुमा नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

किसे नहीं पहनना चाहिए
हर किसी को कछुए की अंगूठी को नहीं पहननी चाहिए।। जिनकी कुंडली में शनि या राहु की स्थिति पहले से खराब हो, उन्हें इसे पहनने से पहले किसी ज्योतिषी से सलाह जरूर लेनी चाहिए। साथ ही गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे इसे न पहनें, ऐसा कहा जाता है।

ध्यान रखें ये बातें
कछुए की अंगूठी पहनकर किसी भी गलत काम में शामिल न हों। साथ ही इसे कभी भी गिरने न दें या पैर से न लगाएं। सोते समय इसे उतार कर साफ जगह पर रखें। एक बार अंगूठी पहनने के बाद इसे बार-बार ना घुमाएं। इससे इसकी दिशा बदल जाती है और धन आगमन में समस्या आती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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