तुलसी की माला से किन मंत्रों का जाप करना चाहिए, जानें नियम

Dec 24, 2025 03:53 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में तुलसी की माला का खास महत्व है। भगवान कृष्ण और विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए तुलसी की माला से जाप करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि तुलसी की माला पर जाप कितनी बार करें, कौन सा मंत्र पढ़ें, चलिए इस बारे में जानते हैं।

तुलसी की माला से किन मंत्रों का जाप करना चाहिए, जानें नियम

हिंदू धर्म में तुलसी की माला का खास महत्व है। साथ ही इसकी माला पर जाप करना फलदायी होता है। जो लोग भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु के उपासक होते हैं वे तुलसी की माला जरूर अपने गले में धारण करते हैं। साथ ही भगवान कृष्ण और विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए तुलसी की माला से जाप करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि तुलसी की माला पर जाप कितनी बार करें, कौन सा मंत्र पढ़ें, चलिए इस बारे में जानते हैं।

ऐसी मान्यता है कि तुलसी की माला गले में पहनने से मन में शांति और आध्यात्मिक पवित्रता बनी रहती है। ज्योतिष के मुताबक तुलसी की माला धारण करने से व्यक्ति की कुंडली में मौजूद बुध और गुरु दोनों ही ग्रह मजबूत होते हैं।

मंत्र

तुलसी की माला से इन मंत्रों का जाप करना शुभ फलदायी होता है।

पहला मंत्र- ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:

इसके अलावा राम-राम और श्रीकृष्ण मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।

अगर तुलसी की माला से जाप करना शुरू करते हैं, तो संकल्प लेकर करें। संकल्प लेते हुए भगवान से कहें आप अपने सामर्थ्य अनुसार तुलसी माला से जाप करेंगे। वैसे आप शुरूआत 1, 5, 7, 11, 21 किसी संख्या में कर सकते हैं। इसके अलावा पूर्व मुख या उत्तर मुख आसान पर बैठ कर जाप करें। तुलसी से आप किसी समय मंत्र का जाप कर सकते हैं

तुलसी माला जपने के नियम

तुलसी की माला जपने के कुछ नियम होते हैं। जैसे कि जिस तुलसी की माला से आप जाप करते हैं उसे कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। तुलसी की माला जपने के बाद उसे साफ-सुथरी जगह पर रखें। तुलसी की माला में कम से कम 27 और ज्यादा से ज्यादा 108 मनके यानी दाने होने चाहिए। ध्यान रखें कि कभी भी किसी दूसरे की इस्तेमाल की हुई माला से जाप न करें। जाप करने से पहले माला को गंगाजल से शुद्ध करें। तुलसी की माला को जाप करने के बाद उसे कपड़े (गोमुखी) में लपेटकर रख देना चाहिए।

माला के प्रकार

तुलसी के माला दो तरह की होती हैं। पहली श्यामा और दूसरी रामा तुलसी। इन्हीं दोनों से ही तुलसी की माला बनाई जाती है। मान्यता है कि श्यामा तुलसी की माला पहने से व्यक्ति को मानसिक शांति और मन में सकारात्मक ऊर्जा का भाव पैदा होता रहता है। वहीं, श्मामा तुलसी की माला से आर्थिक फायदे के साथ भगवान की कृपा हासिल होती है। वहीं रामा तुलसी की माला से भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

तुलसी माला पहनने के नियम

माला पहनते समय शरीर और मन दोनों शुद्ध हों। स्नान करके पहनना सबसे अच्छा माना जाता है।

तुलसी को पवित्र माना जाता है, इसलिए माला को साफ और ऊँचे स्थान पर रखें।

माला पहनने वाले को मांस, मछली, अंडा, शराब आदि से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

कुछ परंपराओं में सोते समय माला उतारने को कहा गया है, जबकि कई लोग लगातार पहनते हैं।

शौच, स्नान या किसी अपवित्र कार्य के समय माला उतार देना उचित माना जाता है।

यदि माला टूट जाए तो उसे किसी पवित्र स्थान (जैसे तुलसी के पौधे के पास या बहते जल में) सम्मानपूर्वक विसर्जित करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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