
सोने की अंगूठी किस हाथ की उंगली में पहननी चाहिए? जानिए नियम
ज्योतिष शास्त्र में सोने का संबंध बृहस्पति ग्रह से माना गया है। मान्यता है कि सोना धारण करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और जीवन में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। लेकिन, इसे धारण करने के कुछ नियम हैं। अगर आपने गलत उंगली में सोने की अंगूठी पहन ली तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है।
सोना एक कीमती धातु है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसका खास महत्व होता है। लोग सोने की अंगूठी पहनते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि सोने की अंगूठी पहनने से धन, सफलता और भाग्य का साथ मिलने लगता है। हालांकि कोई भी धातु या रत्न पहनने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में सोने का संबंध बृहस्पति ग्रह से माना गया है। मान्यता है कि सोना धारण करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और जीवन में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। लेकिन, इसे धारण करने के कुछ नियम हैं। अगर आपने गलत उंगली में सोने की अंगूठी पहन ली तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है। चलिए जानते हैं कि सोना किस हाथ की उंगली में पहनना चाहिए?
महत्व
धार्मिक मान्यता के मुताबिक सोना सिर्फ शृंगार का सामान नहीं है, बल्कि इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सोना पहनने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोना पहनने से सूर्य ग्रह मजबूत होता है। सूर्य जीवन में ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास बढ़ाता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें सोना पहनने की सलाह दी जाती है ताकि जीवन में स्थिरता और सफलता मिल सके।
कौन पहन सकता है
ज्योतिषियों की मानें तो मेष, कर्क, सिंह, धनु, और मीन राशि के लोग सोना धारण कर सकते हैं। वहीं, मकर, मिथुन, कुंभ, और वृषभ राशि के जातकों को सोना नहीं धारण करना चाहिए। कुंडली में गुरु की स्थिति देखकर ही सोना धारण करना चाहिए।
किस उंगली में पहनें
सोने की अंगूठी रिंग फिंगर यानी अनामिका उंगली में पहननी चाहिए। इससे जीवन में उन्नति के रास्ते खुलते हैं और लंबे समय से चली आ रही परेशानियां दूर होती है। ऐसा माना जाता है कि रिंग फिंगर की नसें सीधे दिल से जुड़ी होती हैं, इसलिए इसमें सोने की अंगूठी पहनने से न केवल धन लाभ होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। इसके अलावा छोटी उंगली (लिटिल फिंगर) में भी सोने की अंगूठी पहनना शुभ माना जाता है।
इस उंगली में भी ना पहनें
ज्योतिष के अनुसार, मिडिल फिंगर यानी मध्य उंगली में सोने की अंगूठी पहनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार मिडिल फिंगर शनि ग्रह से जुड़ी होती है और इसमें सोने की अंगूठी पहनने से शनि और सूर्य का टकराव हो जाता है। इसका असर आपके जीवन पर नकारात्मक पड़ सकता है। इससे धन हानि, परेशानियां और रुकावटें आने लगती हैं। इसलिए कभी भी गलती से भी मिडिल फिंगर में सोने की अंगूठी न पहनें।
अंगूठे में भी ना पहनें
इसके अलावा सोने की अंगूठी को अंगूठा में भी नहीं पहनना चाहिए। अंगूठा चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अगर आप अंगूठे में कोई अंगूठी पहनना चाहते हैं तो चांदी की अंगूठी पहनें, ये शुभ मानी जाती है।
सोना कब करें धारण?
गुरु से संबंधित होने के कारण सोने को गुरुवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। वहीं, इसे धारण करने से पहले शुद्धि करना जरूरी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रविवार, बुधवार और शुक्रवार के दिन सोना धारण करना बेहद शुभ माना जाता है।
सोना कैसे करें धारण?
सोना अंगूठी या चेन के रूप में धारण किया जा सकता है।
गंगाजल, दूध और शहद से पहले सोने की शुद्धि करें।
फिर इसे विष्णु भगवान के चरणों में अर्पित कर दें।
विधिवत पूजा-अर्चना करें। कुछ देर के बाद किसी भी उंगली में धारण कर लें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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