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व्रत और दान का फल नहीं मिलता, यहां जानें व्रत और दान के लिए कौन सी तिथियां श्रेष्ठ हैं

व्रत और दान का फल नहीं मिलता, यहां जानें व्रत और दान के लिए कौन सी तिथियां श्रेष्ठ हैं

संक्षेप: dates are best for Daan and Vrat:शास्त्रों में कहा गया है कि व्रत और दान के लिए कुछ तिथियां ही निर्धारित की गई हैं, अगर आप इन तिथियों में व्रत करते हैं और उपवास करते हैं, तो आपको इसका अक्षय फल मिलता है, इसके अलावा की तिथियों में किया गया दान व्यर्थ चला जाता है।

Thu, 13 Nov 2025 10:49 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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शास्त्रों में कहा गया है कि व्रत और दान के लिए कुछ तिथियां ही निर्धारित की गई हैं, अगर आप इन तिथियों में व्रत करते हैं और उपवास करते हैं, तो आपको इसका अक्षय फल मिलता है, इसके अलावा की तिथियों में किया गया दान व्यर्थ चला जाता है। इन तिथियों में कोई भी वैदिक कर्म किया जाए वो निष्फल कहलाता है। सबसे पहले तो सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की तिथियों की बात करते हैं। सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण में जब तक ग्रहण लगा रहे, तब तक की तिथि में जप आदि करना चाहिए। इससे बहुत लाभ होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद दान का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। इसलिए सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को बाद दान जरूर करना चाहिए, इसे पुराणों में बहुत खास बताया गया है।

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कौन सी तिथियां व्रत रखने के लिए उत्तम हैं?
पुराणों की मानें तो एकादशी तिथि, चाहे वो कृष्ण पक्ष की हो या शुक्ल पक्ष की दोनों का व्रत रखना चाहिए। इसके अलावा चतुर्थी, तृतीया, अष्टमी, षष्ठी, पूर्णिमा, चतुर्दशी, अमावास्या तिथि पर व्रत रखना उत्तम माना जाता है। उपवास रखने के लिए ये तिथियां श्रेष्ठ मानी जाती हैं। व्रत रखने के लिए शुक्लपक्ष ही उत्तम माना गया है। द्वादशी का व्रत करते हैं, तो ब्रत में सूर्योदय व्यापिनी द्वादशी पर ही व्रत करना चाहिए।

दान के लिए कौन सी तिथियां महत्वपूर्ण हैं
सूर्य की हर संक्रांति पर स्नान और दान का बहुत फल है। इसमें पुण्यकाल माना जाता है, इस पुण्यकाल में स्नान और दान का बहुत अधिक महत्व है। सूर्य की संक्रान्तियों यानी जब सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं, जैसे तुला संक्रांति, मकर संक्रांति, कन्या संक्रांति आदि में स्रान, दान और जप अगर आप करते हैं तो इसका अक्षय फल प्राप्त होता है। इन संक्रान्तियों में कर्क की संक्रान्ति को दक्षिणायन संक्रम जानना चाहिए। मकर-संक्रान्तिको उत्तरायण संक्रम कहा गया है। इसके अलावा अमावस्या और पूर्णिमा पर भी दिया गया दान उत्तम फल देता है।संक्रान्ति, अमावास्या, व्यतीपात, युगादि तिथि और किसी पुण्य दिन को जो थोड़ा भी दान करता है, वह कोटिगुना हो जाता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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