Vijaya Ekadashi kab hai 2026: विजया एकादशी कब है, दशमी से लेकर द्वादशी तक कैसे करें व्रत और कैसे लें व्रत का संकल्प
एकादशी कब है february mein: फरवरी में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी और शुक्ल पक्ष में रंगभरी एकादशी आती है। विजया एकादशी का संबंध भगवान राम से हैं और रंगभररी एकादशी का संबंध होली से है। विजया एकादशी शिवरात्रि से पहले हो रही है।

फरवरी में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी और शुक्ल पक्ष में रंगभरी एकादशी आती है। इस साल की विजया एकादशी 13 फरवरी हो है। वहीं रंगभरी एकादशी 27 फरवरी हो। विजया एकादशी का संबंध भगवान राम से हैं और रंगभररी एकादशी का संबंध होली से है। विजया एकादशी शिवरात्रि से पहले हो रही है। आइए जानें विजया एकादशी का महत्व और रंगभरी एकादशी कब हैं और इस दिन क्या संयोग बन रहे हैं।
दशमी से लेकर द्वादशी तक कैसे करें व्रत और कैसे लें व्रत का संकल्प
पुराणों में एकादशी व्रत के संकल्प और व्रत की विधि बताईगई है। नारद पुराण में लिखा है कि एकादशी व्रत भगवान् विष्णुको विशेष प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्तिपूर्वक इस व्रत को करते हैं, उनको यह मोक्ष देने वाला है। इस व्रत से पहले दशमीको प्रातःकाल उठकर स्नान करें और इन्द्रियों को वश में रखें। विधिपूर्वक भगवान् विष्णुका पूजन करें। रात में भगवान् नारायण का चिन्तन करते हुए उन्हीं के पास सोएं। एकादशी को सुबह गन्ध, पुष्प आदि सामग्रियों द्वारा भगवान् विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करके इस प्रकार कहे-एकादश्यां निराहारः स्थित्वाद्याहं परेडहनि। भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत॥ कमलनयन अच्युत! आज एकादशीको निराहार रहकर मैं दूसरे दिन भोजन करूंगा। आप मेरे लिये शरणदाता हों। जो यह व्रत करते हैं तो नियमपूर्वक रहकर भगवान् विष्णु के पास बैठकर गीत, वाद्य, नृत्य और पुराणों को सुनें और रात में जागरण करे। इसके बाद द्वादशीके दिन प्रातः:काल उठकर स्नान करे और इन्द्रियों को वश में रखते हुए विधिपूर्वक भगवान् विष्णुकी पूजा करे। भगवान विष्णु को द्वादशी को दूध से नहलाएं।
विजया एकादशी कब?, क्या बन रहे हैं शुभ संयोग
विजया एकादशी में मूल नक्षत्र और जयद योग रहेगा। इसके अलावा इस दिन होगा। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी को दिन में 11.07 बजे पर शुरू होगी, जो 13 फरवरी को दोपहर 01.06 बजे पर समाप्त होगी।
कब है रंगभरी एकादशी
आमलकी एकादशी की तिथि 26 फरवरी को रात के 12.06 बजे पर प्रवेश करेगी और 27 फरवरी को 01.49 बजे पर समाप्त होगी। रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को हैं। काशी से और खाटू श्याम से इस एकादशी का नाता है। इस दिन कहते हैं मां गौरा शादी के बाद पहली बार काशी में आई थीं। इसलिए रंग और गुलाल उड़ाए गएथे। वहीं खाटु श्याम मंदिर राजस्थान में इस दिन रंगभरी एकादशी मेला लगता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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