Nirjala Ekadashi: जानें व्रत में भूलकर भी क्या नहीं करें और कब पानी पिएं समेत 13 सवालों के जवाब
Nirjala Ekadashi Muhurat and Puja Time: निर्जला एकादशी के दिन अन्न और जल ग्रहण करना पूरी तरह से वर्जित है। इस दिन कुछ चीजों का करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि कुछ चीजों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए। जानें निर्जला एकादशी व्रत से जुड़े13 सवालों के जवाब।

Nirjala ekadashi vrat kab hai 2026: निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस बार निर्जला एकादशी व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, यह दिन भी श्रीहरि की उपासना के लिए उत्तम माना जाता है। गुरुवार के दिन निर्जला एकादशी होने के कारण इसका महत्व बढ़ गया है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी से पहले लोग गूगल पर इस व्रत से जुड़े कई सवालों के जवाब सर्च कर रहे हैं। अगर आप भी निर्जला एकादशी व्रत करने वाले हैं, तो यहां जान लें इस व्रत में क्या करें और क्या नहीं करें, कब पानी पिएं और क्या खाना चाहिए समेत जरूरी 13 सवालों के जवाब।
निर्जला एकादशी से जुड़े इन 13 सवालों के जवाब गूगल पर सर्च कर रहे लोग:
1.निर्जला एकादशी व्रत कब है?
निर्जला एकादशी व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को किया जाएगा। जानें पूजन का उत्तम समय क्या है?
2.निर्जला व्रत में पानी कब पीना चाहिए?
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीना पूरी तरह से वर्जित है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है निर्जला यानी बिना अन्न और जल। निर्जला एकादशी व्रत में अन्न और जल का त्याग किया जाता है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में पानी पीने की छूट होती है। क्लिक कर जानें पंडित जी से किन परिस्थितियों में पानी पिया जा सकता है।
3.निर्जला एकादशी व्रत में शाम को क्या खाना चाहिए?
निर्जला एकादशी व्रत में कुछ खाया और पिया नहीं जाता है। अगर स्वास्थ्य कारणों से कोई व्यक्ति निर्जला व्रत नहीं कर सकता है, तो शाम को सात्विक फलाहार जैसे फल, दूध और साबूदाना की खीर का सेवन कर सकता है।
4.निर्जला एकादशी के दिन क्या करना चाहिए?
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। इस दिन जल, वस्त्र, घड़ा, मौसमी फलों और पीले रंग की मिठाई का दान करना लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल मिलता है और समस्त पापों से छुटकारा मिलता है।
5.निर्जला एकादशी का व्रत कैसे रखा जाता है?
हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन और पुण्यदायी माना जाता है। इस व्रत को करने वाले भक्त एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही चावल का त्याग करते हैं और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं। सूर्यास्त के बाद अन्न ग्रहण करनी की मनाही होती है। एकादशी व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होता है और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही खोला जाता है।
6.निर्जला व्रत में पानी कब पीना चाहिए?
निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीने की मनाही है। व्रत के पारण के समय जल और तुलसी दल का सेवन करना चाहिए। मान्यता है कि व्रत के दौरान पानी की एक बूंद भी पीने से व्रत भंग हो जाता है। व्रत के दिन स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद जल ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए।
7.निर्जला एकादशी पर क्या दान करना चाहिए:
निर्जला एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन जल दान श्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन गर्मी से राहत देने वाली सामग्री जैसे छाता, चप्पल, सूती वस्त्र, मौसमी फल और घड़ा आदि का दान कर सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान का अक्षय फल प्राप्त होता है। जानें निर्जला एकादशी के दिन क्या दान नहीं करें
8.निर्जला एकादशी का महत्व क्या है:
निर्जला एकादशी सबसे बड़ी एकादशी व्रत मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी एकादशी व्रत के समान पुण्य मिलता है। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है और सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
9.निर्जला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त:
निर्जला एकादशी के दिन पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:46 बजे से सुबह 05:17 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:21 बजे से दोपहर 02:26 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त शाम 04:35 बजे से शाम 05:40 बजे तक रहेगा। यहां पढ़ें भद्रा कब से कब तक रहेगी और व्रत पारण का समय भी
10.एकादशी कब से कब तक है:
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून को दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ होगी और 25 जून को शाम 04 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी।
11.निर्जला एकादशी के नियम क्या हैं:
निर्जला एकादशी व्रत का महत्वपूर्ण नियम अन्न और जल का त्याग है। व्रत करने वाले साधक को द्वादशी तिथि पर सात्विक भोजन करना चाहिए। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इसके अलावा शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा और दान करना चाहिए।
12.निर्जला एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट:
भगवान विष्णु की प्रतिमा या मूर्ति, नया पीला वस्त्र, तुलसी के पत्ते, पंचामृत, सूखे मेवे, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, मिश्री, मिठाई (भोग के लिए), गंगाजल, कलश, कपूर, आरती की थाली, विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्रनाम की पुस्तक, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (साबुत चावल), फूल-माला, अगरबत्ती, धूप, घी का दीपक, रुई की बाती, मौसमी फल (आम, खरबूजा) आदि।
13. निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें और क्या नहीं करें:
निर्जला एकादशी के दिन विष्णुजी को तुलसी माला चढ़ाना और ठाकुरजी को एक बांसुरी चढ़ाना शुभ फल प्रदान करता है। भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए। एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने की भी मनाही होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
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सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
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