
Mauni Amavasya 2026: कब है मौनी अमावस्या, पितृदोष से मुक्ति के लिए करें ये 5 उपाय
मौनी अमावस्या के दिन पितृ पूजा करने के लिए उत्तम है। इस दिन कुछ उपायों को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और तरक्की के नए राह खुलते हैं। चलिए आज हम जानेंगे कि मौनी अमावस्या कब है और पितृ दोष से मुक्ति के लिए कौन से उपाय करें।
मौनी अमावस्या का खास महत्व होता है। इसे साल की सबसे पवित्र अमावस्या मानी जाती है। यह हर साल माघ मास की कृष्ण पक्ष को पड़ता है, जिस वजह से इसे माघी अमावस्या कहते हैं। इस दिन व्रत, स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन लोग मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति के योग बनते हैं। इसके अलावा इस दिन पितृ पूजा करने के लिए उत्तम है। इस दिन कुछ उपायों को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और तरक्की के नए राह खुलते हैं। चलिए आज हम जानेंगे कि मौनी अमावस्या कब है और पितृ दोष से मुक्ति के लिए कौन से उपाय करें।
कब है मौनी अमावस्या 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दोपहर 12:03 बजे शुरू होकर 19 जनवरी 2026 (सोमवार) को दोपहर 1:21 बजे समाप्त होगी। ऐसे में इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी।
पितृदोष से मुक्ति के लिए क्या करें?
गंगाजल से तर्पण
मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के संगम में स्नान करने और उसके बाद अपने पितरों का गंगा जल से तर्पण देना चाहिए। मान्यता है कि मोक्षदायिनी मां गंगा की कृपा से पितरों का उद्धार होगा। तर्पण के समय कुशा के पोरों से जल पितरों को तर्पित करना चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।
त्रिपिंडी श्राद्ध
पितृ दोष शांती के लिए काशी, गया या त्र्यंबकेश्वर में पितरों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कराने की भी मान्यता है, कहा जाता है कि त्रिपिंडी श्राद्ध कराने से पितृ दोष शांत हो जाता है। धार्मिक मान्यता है क त्रिपिंडी श्राद्ध अपने तीन पीढ़ियों के पूर्वजों के लिए किया जाता है। इस श्राद्ध में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा का विधान है। श्राद्ध के समय पूर्वजों को अन्न से बनाया गया पिंड दान करना चाहिए।
अन्य उपाय
- मौनी अमावस्या के दिन पितृ सूक्त या पितृ कवच का पाठ करना चाहिए, गीता के सातवें अध्याय का पाठ भी कर सकते हैं। ज्योतिष के अनुसार, इससे पितृ दोष मिटता है।
- मौनी अमावस्या के दिन अन्न का दान या पितरों के लिए सफेद वस्त्र का दान कर सकते हैं। इसके लिए आप सफेद रंग के गरम कपड़ों का दान कर सकते हैं। इससे पितृ दोष मिटता है।
- मौनी अमावस्या की शाम जब सूर्य डूब जाता है तो पितर पितृ लोक वापस लौटने लगते हैं। ऐसे में पितरों के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का एक दीपक जलाना चाहिए।
- इसके अलावा पीपले के पेड़ के नीचे भी इस दिन दीपक जलाया जाता है। पूजा के अंत में पीपल देवता की कम से कम 11 बार परिक्रमा करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





