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Makar Sankranti Date : 14 या 15 जनवरी, मकर संक्रांति कब है? नोट कर लें सही डेट, शुभ मुहूर्त और महत्व

Makar Sankranti Date : 14 या 15 जनवरी, मकर संक्रांति कब है? नोट कर लें सही डेट, शुभ मुहूर्त और महत्व

संक्षेप:

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व हजारों सालों से हमारी संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा रहा है। नए साल की शुरुआत में आने वाला यह त्योहार जैसे आने वाले समय की एक झलक देता है। यही वजह है कि मकर संक्रांति को सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नए दौर की शुरुआत माना जाता है।

Jan 03, 2026 07:01 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Makar Sankranti Date : मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व हजारों सालों से हमारी संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा रहा है। नए साल की शुरुआत में आने वाला यह त्योहार जैसे आने वाले समय की एक झलक देता है। यही वजह है कि मकर संक्रांति को सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नए दौर की शुरुआत माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहा जाता है, लेकिन साल भर की सभी संक्रांतियों में मकर संक्रांति का महत्व सबसे अधिक माना गया है।

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मकर संक्रांति का महत्व- मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है और इसे आध्यात्मिक रूप से बेहद शुभ समय माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस काल में किए गए अच्छे काम जल्दी फल देते हैं। महाभारत में भी उत्तरायण का खास उल्लेख मिलता है। कथा है कि भीष्म पितामह ने इसी शुभ समय का इंतजार कर देह त्याग किया था। यही कारण है कि उत्तरायण को मोक्ष और पुण्य से जोड़ा गया है। मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और जप का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं।

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मकर संक्रांति पर दान क्यों इतना खास माना जाता है?- पुराने शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान कभी निष्फल नहीं जाता। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, अनाज और कपड़ों का दान सबसे शुभ माना गया है। तिल को शनि देव से जोड़ा जाता है, इसलिए इसे शनि दोष की शांति के लिए भी उपयोगी माना जाता है। मकर संक्रांति सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह कृषि और मौसम के बदलाव से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों से मनाया जाता है- कहीं पोंगल, कहीं भोगाली बिहू, कहीं लोहड़ी। नाम भले अलग हों, भावना एक ही होती है- कृतज्ञता और नए आरंभ की खुशी। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि जैसे सूर्य अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ता है, वैसे ही इंसान को भी अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना चाहिए।

मकर संक्रांति 2026 कब मनाई जाएगी?- साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी।

शुभ मुहूर्त-

महापुण्य काल: सुबह 8:40 बजे से 9:04 बजे तक

पुण्य काल: सुबह 8:42 बजे से

गंगा स्नान का शुभ समय: सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा

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इस बार बन रहा है खास संयोग- इस बार मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है। यानी 14 जनवरी को सूर्य देव के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। एकादशी होने के कारण इस दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता, लेकिन दान-पुण्य करना बेहद शुभ माना गया है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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