पिठौरी अमावस्या दो दिन, हरतालिका तीज और गणेश चतर्थी एक ही दिन, पढ़ें तिथि और पंचांग
Kushotpatini or Pithori Amavasya: इस वीक पिठौरी अमावस्या और हरतालिका तीज व्रत कब है। इसको लेकर पढ़ें सभी तिथि और पंचांग पढ़ें

इस वीक कुशाग्रहणी अमावस्या दो दिन है। किस दिन पितरों का तर्पणहोगा, यह आप यहां जान सकते हैं। इसके साथ ही हरतालिका तीज व्रत और गणेश कलंक चतुर्थी व्रत एक ही दिन पड़ रहा है। भगवान शिव और गणेश जी के लिए एक ही दिन पूजा होगी। हरतालिका पर अपने पति की लंबी आयु के लिए पत्नियां व्रत रखती हैं और गणेश चतुर्थी पर गणपति की पूजा होती है। यहां पढ़ें इस वीक के व्रत और त्योहार
08 सितंबर (मंगलवार): भाद्रपद कृष्ण द्वादशी तिथि दोपहर 02.44 मिनट तक रहेगी, इसके बाद आज भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 09 सितंबर (बुधवार) : इस दिन भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी तिथि दोपहर 12.31 मिनट तक। मास शिवरात्रि व्रत। कैलास यात्रा प्रारंभ होगी।
कुशाग्रहणी अमावस्या दो दिन
10 सितंबर (गुरुवार) : भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी तिथि सुबह 10.34 मिनट तक ही रहेगी, इसके बाद पश्चात अमावस्या तिथि लग जाएगी,कुशाग्रहणी अमावस्या होने के कारण इस दिन कुशा तोड़ सकते हैं, इसे पिठोरी अमावस भी कहते हैं। कहा जाता है कि सालभर के कार्यों के लिए पंड़ित इस दिन ही कुशा तोड़ लेते हैं। फि किसी भी कार्य में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
11 सितंबर (शुक्रवार) : भाद्रपद कृष्ण अमावस्या तिथि प्रातः 08.57 मिनट तक ही रहेगी, इस दिन भाद्रपद अमावस (स्नान दानादि) के लिए उत्तम है। इसे मातृ अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन पितरों के लिए दान आदि किया जा सकता है। पितरों के लिए तर्पण के लिए भी यही अमावस्या मानी जाएगी।
12 सितंबर (शनिवार) : भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा तिथि प्रातः 07.47 मिनट तक। भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रारंभ। श्री गुरू ग्रंथ साहिब प्रथम प्रकाश दिवस मनाया जाएगा।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी व्रत दोनों एक दिन
13 सितंबर (रविवार) : भाद्रपद शुक्ल द्वितीया तिथि प्रातः 07.09 मिनट तक पश्चात तृतीया तिथि लग जाएगी। इस दिन श्री वराह जयंती भी मनाई जाएगी। इसके साथ हरतालिका तीज व्रत की तिथि इस दिन से शरू हो रही है।
14 सितंबर (सोमवार) : भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि प्रातः 07.07 मिनट तक पश्चात चतुर्थी तिथि रहेगी, लेकिन उदया तिथि में इस दिन ही हरितालिका तृतीया व्रत रखा जाएगा। इस दिन चूंकी चतुर्थी का चांद दिखेगा, इसलिए सिद्धि विनायक व्रत गणेश चतर्थी कहते है, कई जगह इसे कलंक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंद्रदर्शन निषेध होते हैं। कहते हैं कि जो इस दिन चंद्र दर्शन करता है , उस पर मिथ्या दोष लगता है। पत्थर चौथ भी इसी दिन रखा जाएगी। बिहार में इसे चौठचंद्र कहते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


