देवशयनी एकादशी2026 कब:योगिनी ग्यारस के बाद देवशयनी एकादशी,सो जाएंगे देव, शुभ विवाह बंद

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

देवशयनी एकादशी कब है:  आज योगिनी एकादशी है, इसके बाद देवशयनी एकादशी आएगी, जो बहुत खास है, इस दिन से देवसोएंगे और फिर चार महीने बाद जाएंगे। 

देवशयनी एकादशीदेवशयनी एकादशी

इस साल जुलाई में दो एकादशी हैं. इन्हें आषाढ़ मास की एकादशी कहते हैं। आज योगिनी एकादशी है और इसके बाद देवशयनी एकादशी है। देवशयनी एकादशी का भी खास महत्व है, इस दिन से देव सो जाते हैं और शुभ कार्यों पर ब्रैक लग जाता है। वैसे तो इस साल देवशयनी एकादशी से 10 दिन पहले ही शुभ विवाह आदि पर ब्रैक लग जाएगा, क्योंकि गुरु इस समय अस्त हो रहे हैं। गुरु जब अस्त होते हैं तो विवाह आदि नहीं किए जाते हैं। यहां जानें कब से शुरू होंगे शुभ कार्य

किस एकादशी पर कब सोएंगे देव और किस एकादशी पर जागेंगे

24 जुलाई को देवश्यनी एकादशी है, इ स दिन से शुभ मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। क्योंकि भगवान विष्णु के साथ ही सभी देवी-देवता 25 जुलाई से शयन करेंगे, ऐसा कहा जाता है कि श्रीहरि का एक स्वरूप इस दिन राजा बली के पास पाताल लोक में और एक स्वरूप क्षीर सागर में होता है। ऐसे में देवउठनी एकादशी तक सृष्टि का कार्यभार शिवजी संभालेंगे। पूरे 4 महीने भगवान महादेव का पूजन होगा। आपको बता दें कि कहा जाता है कि जो मानव इस एकादशी के माहात्म्यका पाठ करता है, उसे सहस्त्र गोदानों के पुण्य का फल प्राप्त होता है । जो दिन या रात में भक्तिपूर्वक इस माहात्म्य का श्रवण करते हैं, वे निस्सन्देह ब्रह्महत्या आदि पापों से मुक्त हो जाते हैं। एकादशी के समान पापनाशक व्रत दूसरा कोई नहीं है।

15 जुलाई से विवाह नहीं होंगे और कब खुलेंगे विवाह

ज्योतिर्विदों की मानें तो 14 जुलाई को गुरु तारा अस्त होने जा रहा है। गुरु विवाह आदि में महत्वपूर्ण हैं, अगर ये अस्त होते हैं तो शादी विवाह नहीं होते हैं। इसके अलावा 16 जुलाई को कर्क संक्रांति होने से 22 जुलाई को भड़लिया नवमी पर भी विवाह मुहूर्त नहीं है। आमतौर पर लोग भड़लिया नवमी पर विवाह कर लेते हैं, लेकिन इस बार नहीं होंगे। 25 जुलाई शनिवार आषाढ़ शुक्ल एकादशी जिसे देवश्यनी एकादशी भी कहा जाता है। चातुर्मास प्रारम्भ हो रहा है जो 20 नवम्बर शुक्रवार कार्तिक शुक्ल एकादशी तक रहेगा।

इस साल नवंबर में विवाह के हैं महूर्त

इसलिए जबकि ब्रहस्पति 14 जुलाई को अस्त हो रहे हैं। जिसके चलते 14 जुलाई से 20 नवंबर तक शुभ कार्य बंद हैं, जबकि भडलिया नवमी को भी मुहुर्त नहीं है। हालांकि 28 जुलाई से सावन का शुभारंभ हैं। चातुर्मास प्रारम्भ होने से पूर्व का अंतिम शुद्ध विवाह मुहूर्त 12 जुलाई रविवार को है। 14 जुलाई से बृहस्पति अस्त हो जाने के कारण 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से पूर्व ही 20 नवंबर तक समस्त मांगलिक शुभकार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, उपनयन, मुंडन, नामकरण आदि बन्द हो जाएंगे।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें Sawan 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan
Hindi Newsधर्म न्यूज़देवशयनी एकादशी2026 कब:योगिनी ग्यारस के बाद देवशयनी एकादशी,सो जाएंगे देव