कौन सी तपस्या करें कि भगवान खुद वरदान देने आएं? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

Jan 02, 2026 04:48 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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 प्रेमानंद महाराज जी ने भक्त से पूछा कि क्या वरदान मांगना चाहते हो? तो भक्त ने कहा कि चक्रवर्ती राजा बनना है। फिर महाराज जी कहते हैं कि चक्रवर्ती नहीं रह गया है। चक्रवर्ती का मतलब होता है कि जहां से सूर्य उदय होता है, जहां तक अंत होता है। कलयुग में अब ये नहीं रह गया है।

कौन सी तपस्या करें कि भगवान खुद वरदान देने आएं? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि महाराज जी मैं भगवान से मनचाहा वरदान प्राप्त करना चाहता हूं, मैं ऐसी कौन सी तपस्या या साधना करूं, जिससे भगवान स्वयं वर देने के लिए प्रकट हो जाए? चलिए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज जी ने क्या जवाब दिया।

इसका जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि भगवान ने कहा कि अर्थार्थी भी भक्त कहे गए हैं। महाराज जी कहते हैं कि पहली बात तो ब्रह्मचर्य से रहो। दूसरी बात पवित्र आहार करो, वो भी अल्पाहार। जिससे प्राण पोषण हो जाए और निरंतर नाम जप करो। इससे जो चाहो वो प्राप्त कर सकते हो।

महाराज जी ने बताया क्या ना करें
महाराज जी कहते हैं कि किसी की निंदा ना करें और ना सुनें। लेकिन ये कर पाना खिलवाड़ नहीं है। भगवान को साक्षात्कार करना खिलवाड़ नहीं है। ब्रह्मचर्य किसी तरह खंडित नहीं होना चाहिए। महाराज जी कहते हैं कि मनुष्य शरीर मिला है, बहुत अच्छी बात है। तो निरंतर करते रहें नाम जप।

कितने दिन में प्रकट होंगे भगवान
आगे भक्त ने सवाल पूछा कि कितने दिन लगेंगे भगवान के प्रकट होने में। इसका जवाब देते हुए महाराज जी कहते हैं कि जब तक भगवान प्रकट नहीं होते हैं, तब तक करते रहो। सबसे पहले पाप नष्ट होंगे, हृदय पवित्र होगा। ना जाने कितने जन्मों के पाप हैं, तो जब तक पाप नष्ट नहीं हो जाते, तब तक नाम जपते रहो। तब प्रकाशित हो जाएंगे भगवान। महाराज जी कहते हैं कि जन्म-जन्म मुनि लोग यतन करते हैं, उस परमात्म तत्व को प्राप्त करने के लिए। ऐसे ही भजन करते रहो।

मन मर गया तो?
इस पर भक्त ने सवाल पूछा कि यदि मनचाहा वरदान के लिए यदि मन ही मर गया तो? इस पर महाराज जी कहते हैं कि अगर चाह करके चलोगे, तो भगवान तुम्हारी चाह पूरी करेंगे। भगवान चाह पूरी करेंगे, वो चाहे नष्ट क्यों ना हो जाए।

क्या वरदान मांगना चाहते हो?
महाराज जी ने भक्त से पूछा कि क्या वरदान मांगना चाहते हो? तो भक्त ने कहा कि चक्रवर्ती राजा बनना है। फिर महाराज जी कहते हैं कि चक्रवर्ती नहीं रह गया है। चक्रवर्ती का मतलब होता है कि जहां से सूर्य उदय होता है, जहां तक अंत होता है। कलयुग में अब ये नहीं रह गया है। महाराज जी कहते हैं कि अगर भगवान को ही प्राप्त कर लो, तो सारा ब्रह्मांड तुम्हारा है। चक्रवर्ती तो बहुत छोटा है। आप भगवान के दासत्व को क्यों नहीं मांगते हैं, कि मैं सदैव आपके चरणों के समीप रहूं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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