अपने कल्याण का सबसे सरल उपाय क्या है? प्रेमानंद महाराज जी से जानिए
एक बार उनके दरबार में पहुंचे एक भक्त ने प्रश्न किया कि इस संसार रूपी भवसागर में मनुष्य किस प्रकार सहज और सरल तरीके से अपना कल्याण कर सकता है, जो सबसे श्रेष्ठ हो। आइए जानते हैं, इस पर प्रेमानंद महाराज जी ने क्या उत्तर दिया।

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के सोशल मीडिया पर करोड़ों अनुयायी हैं। यही वजह है कि उनके मुख से निकला हर शब्द तेजी से लोगों तक पहुंचता है। वे अपने भक्तों को सदैव यही संदेश देते हैं कि नामजप ही मोक्ष का सरल मार्ग है। एक बार उनके दरबार में पहुंचे एक भक्त ने प्रश्न किया कि इस संसार रूपी भवसागर में मनुष्य किस प्रकार सहज और सरल तरीके से अपना कल्याण कर सकता है, जो सबसे श्रेष्ठ हो। आइए जानते हैं, इस पर प्रेमानंद महाराज जी ने क्या उत्तर दिया।
प्रेमानंद महाराज का जवाब
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि पवित्र हो या अपवित्र हो, कोई विधि निषेध के बंधन में नहीं, उठते बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते, सोते-जागते, यदि हर समय भगवान का नाम जप करोगे, तो कल्याण होगा। महाराज जी कहते हैं कि इस संसार रोग की अचूक औषधि है, भगवन नाम। ये ब्रह्म राम से भी बढ़कर के राम नाम का नाम है। यह वर देने वालों को भी वर देने का सामर्थ प्रकट कर देता है। जैसे हमारे प्रभु वरदाता हैं, हम अपने प्रभु को भी वर देते हैं। हे श्यामा श्याम बलिहारी जाऊं, ऐसा आशीष करता हूं, कि आप दोनों ऐसे ही खेलते रहो, वृंदावन में।
भाग्यशाली उपासक
महाराज जी कहते हैं कि वो बड़े भी भाग्यशाली उपासक हैं, जिनकी नाम में श्रद्धा हो गई है। हमारा तो जीवन ही नाम है। हमारा साध्य भी नाम है। हमारा साधन भी नाम है। हमारे हृदय में नाम के सिवाय और कोई महत्व नहीं है। ना लोक का, ना परलोक का, ना साधन का, ना साध्य का। नाम ही साधन है, नाम ही साध्य है। गुरु कृपा से एक बात बैठ गई कि कोई भी सेकेंड ऐसा ना जाए, जिसमें हम नाम भूल जाएं।
निरंतर नाम जप करो
महाराज जी कहते हैं कि निरंतर नाम जप में लगो, पवित्र भोजन करो, संतो का संग करो, भक्तों की चरित्र सुनो और नाम जप करो। बड़ा ही मंगल होगा। इसी जन्म में मंगल हो जाएगा। पुत्र के बहाने, नारायण नाम, उच्चारण किया, तो उसे भगवत प्राप्ति हो गई। हम जानकर नारायण-नारायण, हरि-हरि , श्रीराम कृष्ण हरि बोलेंगे, तो हमारा कल्याण नहीं होगा। हमारा कल्याण हो जाएगा। इसलिए विश्वास करके नाम जप करो।
कल्याण के लिए पर्याप्त है
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि अगर विश्वास करके नाम जप करो, तो सारे विघ्नो का नाश करके हृदय को निर्मल करके भगवत आनंद से भर दे वो है भगवान का नाम। संपर्ण ज्ञान, भूत, भविष्य और वर्तमान का त्रिकालज्ञ बना दे नाम। ऐसा ज्ञान जो राम-राम नहीं कह पाते थे, वो मरा-मरा बोले और इतना बड़ा इतिहास रच दिया भगवान का परम पावन चरित्र रख दिया कि आज हमारे जीवन के कल्याण के लिए पर्याप्त है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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