Palmistry: हाथ में कटी हुई भाग्य रेखा का क्या है मतलब? आ सकती है ये दिक्कत, जानें उपाय
हस्तरेखा में बताया गया है कि कटी हुई भाग्य रेखा जिंदगी में कई तरह की दिक्कतें खड़ी कर सकती है। ऐसे में क्या करना चाहिए? जानें यहां।

हस्तरेखा में भाग्य रेखा कहां होती है? अगर ये समझ लिया जाए तो बड़ी आसानी से कई चीजें क्लियर हो सकती हैं। हमारी हथेली पर बनी हर एक रेखा, पर्वत और निशान का कोई ना कोई मतलब जरूर होता है। आज जानेंगे भाग्य रेखा के बारे में। हस्तरेखा में भाग्य रेखा को करियर और जिंदगी की दिशा से जोड़कर देखा जाता है। हर व्यक्ति के हाथ में ये अलग तरीके की होती है और हर एक का कुछ ना कुछ मतलब जरूर है। किसी के हाथ में ये एकदम सीधी और साफ बनी हुई होती है। वहीं कुछ लोगों के हाथ में ये बीच-बीच में कटी हुई होती है। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल आ सकता है कि आखिर ये कटी हुई क्यों है?
हस्तरेखा में इसे जिंदगी में आने वाले बदलाव और उतार-चढ़ाव के संकेत के रूप में देखा जाता है। जानिए कटी हुई रेखा आखिर क्या-क्या इशारा करती है और इससे जुड़े कौन से उपाय किए जा सकते हैं?
भाग्य रेखा को कैसे पहचाना जाए?
अपनी कलाई की ओर देखिए। कलाई की शुरुआत में जो आड़ी रेखा बनी हुई उसे हस्तरेखा की भाषा में मणिबंध कहा जाता है। यही से एक रेखा ऊपर की ओर बीच वाली उंगली यानी मध्यमा के नीचे बने शनि पर्वत तक जाती है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई तस्वीर को जरूर देखें। इससे आप काफी आसान तरीके से समझ जाएंगे कि भाग्य रेखा कहां होती है।
कटी हुआ भाग्य रेखा का मतलब
हस्तरेखा के हिसाब से जब भाग्य रेखा सीधे ऊपर तक जाती है तो ये शुभ मानी जाती है। अगर किसी की हथेली में ये कटी या फिर बीच-बीच में टूटी-फूटी दिख रही है तो इसका मतलब हैं कि उस व्यक्ति की जिंदगी में कई रुकावटं आएंगी और उसे कई बार बदलाव देखने को मिलेंगे।
हालांकि कई लोग इसका मतलब निकालने लगते हैं कि ऐसा व्यक्ति करियर में अच्छा नहीं करेगा या फिर सक्सेसफुल नहीं होगा। ऐसा नहीं है बस उसे अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी होगी और धैर्य रखना होगा।
भाग्य रेखा कटने पर करें ये उपाय
अगर आपकी भाग्य रेखा कटी है या फिर बीच-बीच में टूटती हुई दिख रही है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। हस्तरेखा और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ उपाय से आपकी मुश्किलें कम हो सकती हैं।
- सोच पॉजिटिव रखें।
- शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करें।
- ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
- जरूरतमंदों की मदद करने से आपको लाभ मिलेगा।
- चींटियों को आटा डाल सकते हैं। मान्यता है कि इससे जिंदगी में आने वाली बाधाएं काफी हद तक कम होती हैं।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


