
घर में पूजा और मंदिर के पूजा में क्या अंतर है? जानिए प्रेमानंद महाराज का जवाब
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि घर में भजन करने और गंगा तट पर भजन करने में अंतर होता है। अगर गंगा जल के अंदर भजन कर रहे हो, तो उससे ज्यादा लाभ होगा। तो यह भजन की पद्धतियां हैं। घर से कई गुणा लाभ तीर्थों में, पुरियों में, धामों में पवित्र स्थानों में होता है।
पूजा घर एक पवित्र स्थल है, जहां लोग भगवान की पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं। आजकल लोग घरों में पूजा के लिए अलग कमरा बनवाते हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि घर में ही पूजा कर लेने से देवी-देवता प्रसन्न हो जाते हैं और यही वजह है कि लोग मंदिर कम जाते हैं। इसे लेकर एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि घर में पूजा और मंदिर में पूजा में क्या अंतर होता है? चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया।
महाराज जी का जवाब
इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि घर की पूजा और मंदिर में जाकर पूजा में अंतर है। महाराज जी कहते हैं कि घर की पूजा, मंदिर में जाकर, तीर्थ स्थान में जाकर, फिर धाम में जाकर इसमें विशिष्ट फल हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कि घर में रहकर आप 1000 माला जपे और गौशाला में जाकर के सौ माला जपे और देवालय में बैठकर के एक माला जपे। एक माला आपकी 1000 माला के बराबर होगी।
भगवत प्राप्ति की लालसा
महाराज जी कहते हैं कि आप वृंदावन धाम में जपे, तो एक माला एक लाख माला के बराबर होगी। तो घर का भजन और तीर्थों का भजन अलग है। महाराज जी कहते हैं कि जब भगवत प्राप्ति की ललसा होती है, तो हम तीर्थों की यात्रा करते हैं, संतों का समागम करते हैं, बड़े-बड़े देवालयों के दर्शन करते हैं। उससे हमारा हृदय पवित्र होता है।
गंगा तट में भजन
वो कहते हैं कि घर में भजन करने और गंगा तट पर भजन करने में अंतर होता है। अगर गंगा जल के अंदर भजन कर रहे हो, तो उससे ज्यादा लाभ होगा। तो यह भजन की पद्धतियां हैं। घर से कई गुणा लाभ तीर्थों में, पुरियों में, धामों में पवित्र स्थानों में होता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





