भगवान की आरती करने का सही तरीका क्या है? जानिए इसके लाभ

Feb 06, 2026 06:16 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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ई भी पूजा बिना आरती के अधूरी मानी जाती है। भगवान की आरती का खास महत्व होता है। यह भक्ति, ध्यान और समर्पण के भाव को दर्शाता है। मान्यता है कि अगर आरती सही विधि और मन से की जाए, तो इससे कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। लेकिन बहुत से कम लोग जानते हैं कि आरती करने का भी एक सही तरीका होता है।

भगवान की आरती करने का सही तरीका क्या है? जानिए इसके लाभ

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जिस घर में नियमित पूजा-पाठ होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। लेकिन कोई भी पूजा बिना आरती के अधूरी मानी जाती है। भगवान की आरती का खास महत्व होता है। यह भक्ति, ध्यान और समर्पण के भाव को दर्शाता है। मान्यता है कि अगर आरती सही विधि और मन से की जाए, तो इससे कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। लेकिन बहुत से कम लोग जानते हैं कि आरती करने का भी एक सही तरीका होता है। चलिए आज जानते हैं कि आरती का सही तरीका क्या है और इससे लाभ क्या है।

अक्सर आपने देगा होगा कि देवी और देवताओं की आरती घी के दीपक या कपूर से करते हैं। इस दौरान संबंधित देवी और देवता की आरती भी गाते हैं और आरती की थाल को देवताओं के सामने घुमाते भी हैं। लेकिन इसे घुमाने का भी तरीका शास्त्रों में बताया गया है।

कितनी बार घुमाएं आरती की थाल
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आरती की शुरुआत में हमेशा भगवान चरणों से करनी चाहिए। उनके चरणों में थाली को चार बार घुमाना शुभ माना जाता है। इसके तुरंत बाद भगवान की नाभि की ओर दो बार थाल को घुमाना सही माना जाता है। फिर भगवान के चेहरे के सामने आरती करनी चाहिए। इस बार थाल सिर्फ एक बार घुमाना है। आखिरी में भगवान के पूरे शरीर पर आरती की थाली सात बार घुमानी चाहिए। माना जाता है कि इस तरह कुल 14 बार आरती घुमाने से चौदह भुवनों तक आपकी भक्ति पहुंचती है।

आरती करते समय ध्यान रखें ये बातें

- आरती हमेशा खड़े होकर करना चाहिए। बैठकर आरती कभी नहीं करना चाहिए।

- आरती हमेशा झुककर करना चाहिए। इसे भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

- आरती की थाली सही धातु की हो- तांबे, पीतल या चांदी की थाली में आरती करें।

- आरती करने के लिए गाय के घी में डूबी हुई रुई की 5 बत्तियों का दीपक जलाएं। इसे पंच प्रदीप कहा जाता है।

आरती से लाभ

- आरती से मन की नकारात्मकता कम होती है और मन शांत होता है।

- आरती के दौरान दीपक और मंत्रों से वातावरण शुद्ध होता है।

- नियमित आरती करने से ध्यान और आत्म-नियंत्रण मजबूत होता है।

- मान्यता है कि नियमित आरती से घर में शांति और शुभता बनी रहती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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