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पूजा घर में घंटी रखने व बजाने का सही तरीका क्या है?

पूजा घर में घंटी रखने व बजाने का सही तरीका क्या है?

संक्षेप:

मान्यता है कि घंटी हर समय नहीं बजाई जाती है। कुछ विशेष समय के दौरान ही घंटी बजाना शास्त्रों में उचित माना गया है नहीं तो इससे दोष लग सकता है। ऐसे में आज हम जानेंगे कि घंटी को कहां रखें और इसे बजाने का सही तरीका क्या है?

Jan 07, 2026 05:50 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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घर में पूजा का स्थान बेहद पवित्र माना जाता है। लोग घर बनवाते समय उचित दिशा में पूजा घर बनवाते हैं। यहां भगवान की मूर्ति समेत कई चीजें रखते हैं। इन्हीं में से एक चीज है घंटी। घर में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने का खास महत्व होता है। लेकिन वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में इसे रखने और बजाने का नियम बताया गया है, जिनका जरूर पालन करना चाहिए। मान्यता है कि घंटी हर समय नहीं बजाई जाती है। कुछ विशेष समय के दौरान ही घंटी बजाना शास्त्रों में उचित माना गया है नहीं तो इससे दोष लग सकता है। ऐसे में आज हम जानेंगे कि घंटी को कहां रखें और इसे बजाने का सही तरीका क्या है?

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महत्व
धार्मिक मान्यता है कि पूजा की घंटी घर में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करती है और इसकी ध्वनि से कई समस्याओं का निवारण होता है। इसकी आवाज से नकारात्मकता दूर हो जाती है। घंटी बजाना ईश्वर से सीधे संपर्क साधने का तरीका माना जाता है।

कहां रखें
घर के मंदिर में घंटी हमेशा पूजा की मूर्तियों के बाईं ओर रखनी चाहिए। घंटी को हमेशा ऐसे उठाएं कि आपका दाहिना हाथ घंटी के ऊपरी हिस्से पर होना चाहिए। पूजा की घंटी कभी भी मंदिर के दक्षिण दिशा की ओर न रखें। घंटी को हमेशा सीधे हाथ से पकड़ना चाहिए। यही नहीं घंटी हमेशा आपको सीधे हाथ से ही बजानी चाहिए। घंटी बजाते समय ध्यान रखें कि इसकी आवाज पूरे घर के सभी कोनों में पहुंचनी चाहिए। घंटी को कभी भी मंदिर की दक्षिण दिशा की ओर न रखें।

कब बजाएं
मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजानी चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से आप अपनी उपस्थिति भगवान को दर्ज कराते हैं और उनका ध्यान आकर्षित करते हैं। वहीं, जब मंदिर में भगवान की आरती की जाती है, तो उस दौरान लयबद्ध तरीके से घंटी बजाना भी शुभ माना जाता है। भगवान को भोग लगाते समय और उन्हें सुलाते समय भी घंटी बजाना शुभ होता है।

वहीं, शास्त्रों के मुताबिक, रात के समय घंटी नहीं बजानी चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि सिर्फ शयन आरती हेतु घंटी बजाना बाहरी मंदी एवं घर के मंदिर में मान्य है। एक बार भगवान शयन कर लें फिर इसके बाद आप किसी भी प्रकार का पूजा-पाठ क्यों न करें,लेकिन घंटी नहीं बजानी चाहिए। कई लोग जागरण करवाते हैं तो रात के समय या भोर में आरती करते हुए घंटी बजाते हैं, जिसे गलत माना गया ह।

फायदा
- माना जाता है कि घंटी की ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां दूर होती हैं।
-घंटी की आवाज वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे मन शांत और प्रसन्न रहता है।
-यह माना जाता है कि घंटी की ध्वनि देवताओं को जागृत करती है और भक्तों की प्रार्थनाओं को उन तक पहुंचाती है।
-वहीं, पुराणों के मुताबिक मंदिर में घंटी बजाने से मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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