क्रिसमस से पहले एड्वेंट सीजन क्या है, जानें इसके बारे में
उत्सवों का महीना दिसंबर क्रिसमस की तारीख पच्चीस दिसंबर है, लेकिन क्रिसमस की शुरुआत पहली दिसंबर से ही हो जाती है। इस महीने के चारों हफ्तों को एड्वेंट सीजन कहा जाता है। एड्वेंट सीजन में लोग बाजारों, घरों और गिरिजाघरों में खुशियां मनाते हैं।

उत्सवों का महीना दिसंबर क्रिसमस की तारीख पच्चीस दिसंबर है, लेकिन क्रिसमस की शुरुआत पहली दिसंबर से ही हो जाती है। इस महीने के चारों हफ्तों को एड्वेंट सीजन कहा जाता है। एड्वेंट सीजन में लोग बाजारों, घरों और गिरिजाघरों में खुशियां मनाते हैं। अपने घरों को सजाते हैं। पकवान बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ मिल-बांट कर खाते हैं। आइए इसे गहराई से समझते हैं : पहला रविवार ‘आशा’ का है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रभु यीशु मसीह का इस संसार में आना ही हमारी सबसे बड़ी आशा है। वह आशा, जो जरूर पूरी होगी। ईसाई समुदाय विश्वास के जरिये ही इस आशा को बनाए रखते हैं। बाइबिल इस बात को कुछ इस तरह बताती है- ‘क्योंकि जो आशा देखी जाती है, वह आशा नहीं।’ (रोमियों 8:24), यानी जो आप देख सकते हैं, वह तो सामने है, लेकिन जो नहीं देख सकते वही आशा है। दूसरा रविवार ‘शांति’ के रविवार के रूप में मनाया जाता है। यीशु मसीह शांति के दूत हैं। दुख और परेशानी से भरी दुनिया में शांति लाने वाले यीशु मसीह इंसान को सच्ची शांति देते हैं। बाइबिल के अनुसार- ‘मैं तुम्हें शांति देता हूं, जैसी संसार देता है, वैसी नहीं।’ (यूहन्ना 14:27)। इसका अर्थ यह है कि जो शांति यीशु देता है, उसको वही महसूस कर सकता है, जिसने इसका अनुभव किया हो। यह शांति ऐसी नहीं है, जैसी संसार में होती है। यह अलग है, खास है। तीसरा रविवार ‘आनंद’ का है। यह यीशु के जन्म के आनंद की घोषणा करता है। वह आनंद, जो अद्भुत है। जो इसका अनुभव करता है, वही इसका बयान कर सकता है। यह आनंद इंसान को ताकत देता है। बाइबिल बताती है- ‘प्रभु में सदा आनंदित रहो।’ (फिलिप्पियों 4:4), इसका अर्थ है कि हमें हर परस्थिति में आनंदित रहना चाहिए, क्योंकि प्रभु का आनंद ही हमारी ताकत है। चौथा रविवार ‘प्रेम’ का प्रतीक है।
यीशु ही प्रेम है। यीशु ने हमें सिखाया कि हम अपने परमेश्वर से और सब से प्रेम करें। बाइबिल का वचन यह कहता है- ‘क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।’ (यूहन्ना 3:16)। इसका अर्थ यह है कि पिता परमेश्वर ने अपने पुत्र को दुनिया के लिए बलिदान के रूप में भेजा। चरनी में पैदा होकर, क्रूस पर जान देकर, प्रभु यीशु ने प्रेम का परचम लहराया। इस अवसर पर कैरोल सिंगिंग होती है। यीशु मसीह के लिए गीत गाकर उसकी महिमा को बढ़ाना ही कैरोल सिंगिंग है। कुछ प्रचलित गीत जैसे- ‘जॉय टू द वर्ल्ड’, ‘साइलेंट नाईट’ हैं। कैरोल सिंगिंग के माध्यम से लोग समूह बनाकर गीत गाते हैं और यह शुभ समाचार सुनाते हैं कि यीशु हमारे पापों के लिए जन्मा। उसने क्रूस पर अपने प्राण देकर हमें धोया और नया जीवन दिया। लोग बड़े जोश से रात में ग्रुप बनाकर, साज लेकर दोस्तों के घर जाकर गीत गाते हैं और प्रभु यीशु के नाम का गुणगान करते हैं। क्रिसमस के बाद आती है, वॉच नाइट सर्विस। वॉच नाइट सर्विस वह विशेष आराधना सभा होती है, जो इकतीस दिसंबर की रात को पुराने वर्ष को विदा करने और नए वर्ष का स्वागत करने के लिए आयोजित की जाती है।
इस रात लोग परमेश्वर की उपस्थिति में जागते हुए प्रार्थना, भजन, आराधना और वचन के द्वारा समय बिताते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि हम बीते वर्ष के लिए धन्यवाद दें। अपनी गलतियों के लिए पश्चाताप करें और नए वर्ष को परमेश्वर को समर्पित करें। आत्मिक जागरूकता में बने रहें। बाइबिल हमें बताती है- ‘इस कारण जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा।’ (मत्ती 24:42) -सिस्टर वंदना सेनगुप्ता क्रिश्चियन मोटिवेशनल स्पीकर

लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।
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