जून तक रहेगा गुरु चांडाल योग, गुरु-चांडाल योग क्या होता है? हानि ही नहीं लाभ भी देता है यह योग
guru chandal yog effect: वर्तमान समय में गोचर में 05 दिसंबर, 2025 से गुरु राहु के दृष्टि संबंध से गुरु चांडाल योग बना हुआ है। यह 01 जून, 2026 तक रहेगा। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु और राहु एक साथ या दृष्टि संबंध द्वारा जुड़े हों, तब गुरु चांडाल योग बनता है।

वर्तमान समय में गोचर में 05 दिसंबर, 2025 से गुरु राहु के दृष्टि संबंध से गुरु चांडाल योग बना हुआ है। यह 01 जून, 2026 तक रहेगा। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु और राहु एक साथ या दृष्टि संबंध द्वारा जुड़े हों, तब गुरु चांडाल योग बनता है। जिन कुंडली में गुरु चांडाल योग होता है, उन्हें जीवन में कई कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति फैसला सही से नहीं ले पाता, कंफ्यूज रहता है। इसके अलावा लाइफ में गलत संगति में भी पड़ जाता है। कुछ खास अपवादों को छोड़ दिया जाए तो यह योग बहुत नकारात्मक है।
गुरु चांडाल योग के अपवाद
यदि किसी जातक की कुंडली में गुरु उच्च राशि में हो। राहु तथा गुरु के साथ कोई और ग्रह भी कुंडली में उपस्थित हो। यदि गुरु अस्त हो, वक्री हो। यदि कुंडली में गुरु केंद्र का स्वामी हो तथा त्रिकोण में राहु के साथ स्थित हो, ऐसी स्थिति में गुरु चांडाल योग अच्छे परिणाम देता है। इस स्थिति में इस योग का कोई असर नहीं होता है। इसके अलावा इसके कुछ उपाय भी राहु को शांत कर देते हैं, जिससे आपको लाभ होता है।
गुरु चांडाल योग के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए राशि के अनुसार ये उपाय करें
मेष : एकादशी को पुजारी को पीले भोजन का दान। धार्मिक कार्य से जुड़ें।
वृष : सुगंधित पदार्थ का प्रयोग तथा पानी में लोबान डालकर स्नान करें।
मिथुन : घर में फिटकरी मिले पानी से पोंछा लगाएं। बांह में हल्दी की गांठ बांधें।
कर्क : बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। ज्यादातर सफेद वस्त्र का प्रयोग करें।
सिंह : विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ-आरती करें। गुरुजनों का सम्मान करें।
कन्या : बुधवार-शनिवार को घर में वस्त्रों की साफ-सफाई स्वयं करें।
तुला : विष्णु एवं शंकर की पूजा करें तथा चांदी का आभूषण धारण करें|
वृश्चिक : पूर्णिमा को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। हल्दी का तिलक लगाएं।
धनु : हल्दी मिले पानी से स्नान तथा पीले खाद्य पदार्थ का सेवन करें।
मकर : शनिवार-अमावस्या को सफाई कर्मी को खाद्य सामग्री का दान करें।
कुंभ : कार्य में सदैव अग्रिम तैयारी रखें। जीव-जंतुओं से भोजन बांटें।
मीन : एकादशी या पूर्णिमा को पीपल का पेड़ लगाएं। शिक्षक या पुजारी को पीले वस्त्र उपहार में दें। -ज्योतिर्विद समीर उपाध्याय
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।
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