Adhik Maas 2026:क्या है अधिकमास, अधिकमास कैसे बन गया पुरुषोत्तम मास, यहां पढ़ें

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
share

जिस चंद्र मास में संक्रांति नहीं होती, उसे अधिमास या मलमास कहते हैं। हर तीन वर्ष पश्चात आने वाले इस मास को पुरुषोत्तम मास (17 मई से 15 जून) भी कहा जाता है। ब्रह्मा द्वारा रचित प्रकृति के नियमानुसार बारह माह थे।

Adhik Maas 2026:क्या है अधिकमास, अधिकमास कैसे बन गया पुरुषोत्तम मास, यहां पढ़ें

जिस चंद्र मास में संक्रांति नहीं होती, उसे अधिमास या मलमास कहते हैं। हर तीन वर्ष पश्चात आने वाले इस मास को पुरुषोत्तम मास (17 मई से 15 जून) भी कहा जाता है। ब्रह्मा द्वारा रचित प्रकृति के नियमानुसार बारह माह थे। दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अमर होने के लिए ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और उसने उनसे अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा ने अमर होने का वरदान देने की जगह दूसरा वरदान मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा से कहा कि उनके बनाए प्राणी- सुर-असुर, पशु-पक्षी और मनुष्य उसे न मार पाएं। वह न दिन में मरे, न रात में। न घर के भीतर मरे, न घर के बाहर। न पृथ्वी पर मरे, न आकाश में। वह न किसी युद्ध में अस्त्र से मरे, न किसी शस्त्र से। न बारह मास में से किसी मास में मरे। वह पूरे ब्रह्मांड का एकछत्र राजा कहलाए। ब्रह्मा ने उसे उसका मनचाहा वरदान दे दिया।

हिरण्यकश्यप मारने के लिए बना अधिमास

वरदान पाकर हिरण्यकश्यप अपने को भगवान मानने लगा। जो उसे भगवान नहीं मानता, वह उसका वध करवा देता। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को खूब यातनाएं दीं, लेकिन उसने न तो भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ी और न ही अपने पिता को भगवान माना। अंत में भगवान विष्णु ने ब्रह्मा के वरदान केे अनुसार ‘नरसिंह’ रूप में प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया। इसके लिए उन्होंने बारह मास के अतिरिक्त तेरहवें मास के रूप में अधि मास का निर्माण किया। नरसिंह रूप धरा यानी न सुर, न असुर, न नर, न पशु और न ही ब्रह्मा की सृष्टि का अंग। उस समय सांध्य वेला थी यानी न दिन था, न रात। उसका न महल के भीतर, न बाहर, चौखट पर ले जाकर वध किया। यह युद्ध भी नहीं था। उन्होंने उसे अपनी जंघा पर रखकर उसके पेट को अपने नाखूनों से चीर कर वध किया। यानी न तो वह आकाश में था, न पृथ्वी पर। न ही किसी अस्त्र से मरा, न ही किसी शस्त्र से।

इसलिए बना अधिमास

हिरण्यकश्यप के वध करने के उद्देश्य से बना तेरहवां मास अधिमास (मलमास) कहलाया। बारह मास में से हर मास के देवता थे, लेकिन कोई भी देवता इस मास के अधिपति बनने को तैयार नहीं हुए। तब सभी ऋषि-मुनियों सहित अधि मास विष्णु के पास पहुंचे और उन्हें अपनी व्यथा सुनाई। तब विष्णु उन्हें कृष्ण के पास लेकर गए। कृष्ण ने अधिमास को वरदान देते हुए कहा कि आज से मैं तुम्हारा स्वामी हूं और तुम मेरे एक नाम पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे। पुरुषोत्तम मास होने के बावजूद इस मास में मांगलिक और शुभ कार्य करने वर्जित माने गए हैं।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!