
युधिष्ठिर ने क्या दिया यक्ष के प्रश्नों का जवाब-मनुष्य की आत्मा कौन है? भाग्य द्वारा प्राप्त मित्र कौन है?
उदारता और सेवा सर्वोत्तम धर्म दुर्योधन को गंधर्व चित्रसेन के बंधन से मुक्त कराकर पांडव द्वैत वन वापस आ गए। उसी समय एक ब्राह्मण युधिष्ठिर के पास आकर बोला- ‘महाराज, मैंने अरणियों के साथ अपना सामान एक वृक्ष पर टांगा हुआ था।
उदारता और सेवा सर्वोत्तम धर्म दुर्योधन को गंधर्व चित्रसेन के बंधन से मुक्त कराकर पांडव द्वैत वन वापस आ गए। उसी समय एक ब्राह्मण युधिष्ठिर के पास आकर बोला- ‘महाराज, मैंने अरणियों के साथ अपना सामान एक वृक्ष पर टांगा हुआ था। एक मृग उसे लेकर भाग गया है। आप उसे वापस दिलाने की कृपा करें।’ युधिष्ठिर ने ब्राह्मण को आश्वस्त करते हुए पहले जल पीने के लिए कहा और नकुल से जल लाने के लिए कहा।’ समीप ही एक जल कुंड था। नकुल ने कुंड में जैसे ही पात्र डाला, सरोवर से आवाज आई- ‘ठहरो, पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, तभी तुम जल ले सकते हो।’ नकुल ने उस आवाज की अनसुनी करते हुए पानी लेना चाहा। आवाज लगाने वाले यक्ष ने तुरंत उसे अचेत कर दिया। इसी प्रकार सहदेव, अर्जुन और भीम भी क्रम से पानी भरने आए और यक्ष के प्रश्नों की ओर ध्यान न देने के कारण अचेत हो गए। अंत में युधिष्ठिर आए। उनसे भी यक्ष ने वही बात कही। युधिष्ठिर ने धैर्यपूर्वक यक्ष से प्रश्न पूछने के लिए कहा।
यक्ष : धर्म का एकमात्र साधन क्या है? यश प्राप्ति व स्वर्ग प्राप्ति का एकमात्र साधन क्या है? युधिष्ठिर : दक्षता धर्म का एकमात्र साधन है। दान यश का एकमात्र उपाय है। सत्य ही स्वर्ग प्राप्ति का एकमात्र साधन है। यक्ष : मनुष्य की आत्मा कौन है? भाग्य द्वारा प्राप्त मित्र कौन है? युधिष्ठिर : पुत्र मनुष्य की आत्मा है। पत्नी भाग्य द्वारा प्राप्त मित्र है। यक्ष : सर्वोत्तम लाभ व सुख क्या है? युधिष्ठिर : निरोगता सर्वोत्तम लाभ है। संतोष सर्वोत्तम सुख है। यक्ष : धर्म से बढ़कर क्या है? कौन-सा धर्म सर्वोत्तम है? वह क्या है, जिसको नियंत्रण करके प्रसन्नता होती है? किनके साथ मित्रता करके दुख नहीं होता? युधिष्ठिर : उदारता धर्म से बढ़कर है। सेवा सर्वोत्तम धर्म है। मन का नियंत्रण करके प्रसन्नता होती है। सज्जनों की मित्रता से कभी दुख नहीं होता।
यक्ष : किसे त्याग कर मनुष्य सबका प्रिय हो जाता है? किस वस्तु के त्याग से शोक नहीं होता? युधिष्ठिर : अहंकार के त्याग से मनुष्य सबका प्रिय हो जाता है। क्रोध के त्याग से शोक नहीं होता। यक्ष : तप का लक्षण क्या है? सबसे बड़ी क्षमा क्या है? युधिष्ठिर : स्वधर्म का पालन ही तपस्या है। सुख-दुख को सहन करना सबसे बड़ी क्षमा है। यक्ष : दुर्जय शत्रु कौन है? अंत न होने वाली बीमारी क्या है? युधिष्ठिर : क्रोध दुर्जय शत्रु है। लोभ कभी समाप्त न होनेवाली बीमारी है। यक्ष : सबसे बड़ा स्नान व दान क्या है? युधिष्ठिर : मनोविकारों का त्याग सबसे बड़ा स्नान है। प्राणी की रक्षा ही सबसे बड़ा दान है। यक्ष : उत्तम मार्ग क्या है? सबसे अधिक प्रसन्न व्यक्ति कौन है? युधिष्ठिर : सज्जनों द्वारा सेवन किया मार्ग उत्तम मार्ग है। जो परिवार के साथ प्रसन्न रहता है, वही सबसे प्रसन्न व्यक्ति है। युधिष्ठिर ने यक्ष के सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए। इनसे प्रसन्न होकर यक्ष ने उनके सभी भाइयों को पुन: जीवित कर दिया। डॉ. रवींद्र नागर





