Weekly Panchang: इस वीक विजया एकादशी व्रत, शनि प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और अमावस्या, 16 फरवरी तक व्रत-त्योहार लिस्ट
इस वीक विजया एकादशी से लेकर शनि प्रदोष व्रत और भगवान शिव का महापर्व महाशिवरात्रि भी है। विजया एकादशी का व्रत इस साल 13 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत रखा था, लंका पर चढ़ाई से पहले, तभी से इसे विजया एकादशी कहा जाने लगा।

10 फरवरी से 16 फरवरी 2026 तक व्रत और त्योहार: इस वीक विजया एकादशी से लेकर शनि प्रदोष व्रत और भगवान शिव का महापर्व महाशिवरात्रि भी है। विजया एकादशी का व्रत इस साल 13 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत रखा था, लंका पर चढ़ाई से पहले, तभी से इसे विजया एकादशी कहा जाने लगा। इसके बाद शनि प्रदोष व्रत है, जिसमें शनिदेव और शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। इसके बाद 16 फरवरी को स्नान और दान की अमावस्या भी है, इसके अगले दिन सूर्य ग्रहण लग रहा है। श्री महाशिवरात्रि व्रत।फाल्गुन त्रयोदशी की शुरुआत 14 फरवरी को शाम 4.02 बजे से होगी और 15 फरवरी को शाम 5:30 बजे समाप्त होगी।महाशिवरात्रि पर इस साल भद्रा भी लग रही है। इसके अंतराल में ही 5:06 बजे से चतुर्दशी लगने से त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी का संयोग भी रहेगा। शाम 7:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग के अलावा इस दिन उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र और व्यतीपात योग पूरे दिन रहेगा। ग्रहों की बात करें तो महाशिवरात्रि पर चार ग्रहों का उत्तम संयोग बन रहा है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र के आने से चतुर्ग्रही योग का निर्माण भी होगा, जो कई सालों बाद होता है। शाम को चतुर्दशी लगने के बाद ही चार प्रहर की पूजा होगी। कहते हैं भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में ही होती है, इसलिए शाम को त्रयोदशी और चतुर्थी दोनों मिल रही हैं। यहां देखें 10 फरवरी से लेकर 16 फरवरी तक के व्रत और त्योहारों की तिथि कब से शुरू हो रही है।
10 फरवरी (मंगलवार): फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि प्रातः 07.28 मिनट तक।
11 फरवरी (बुधवार) : फाल्गुन कृष्ण नवमी तिथि प्रातः 09.59 मिनट तक। भद्रा रात्रि 11.11 मिनट से। गंडमूल प्रातः 10.53 मिनट से।
12 फरवरी (गुरुवार) : फाल्गुन कृष्ण दशमी तिथि दोपहर 12.23 मिनट तक। भद्रा दोपहर 12.23 मिनट तक। फाल्गुन संक्रांति। स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती। गंडमूल विचार।
13 फरवरी (शुक्रवार) : फाल्गुन कृष्ण एकादशी तिथि दोपहर 02.26 मिनट तक पश्चात द्वादशी तिथि। विजया एकादशी व्रत। गंडमूल सायं 04.13 मिनट तक।
14 फरवरी (शनिवार) : फाल्गुन कृष्ण द्वादशी तिथि सायं 04.02 मिनट तक पश्चात त्रयोदशी तिथि। शनि प्रदोष व्रत।
15 फरवरी (रविवार) : फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तिथि भद्रा सायं 05.05 मिनट से रात्रि 05.20 मिनट (सूर्योदय पूर्व) तक।
16 फरवरी (सोमवार): फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि सायं 05.35 मिनट तक पश्चात अमावस तिथि।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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