Ketu Ratna Lehsuniya: केतु का रत्न लहसुनिया किसे पहनना चाहिए? जानिए धारण करने का सही तरीका
Lehsuniya Ratna Pehne ke Niyam: रत्नशास्त्र के अनुसार केतु के रत्न लहसुनिया को अगर सही नियम से पहना जाए तो ये कई लाभ दे सकता है। जानिए किन लोगों को ये रत्न सूट करता है?

रत्नशास्त्र के अनुसार हर एक ग्रह से जुड़ा हुआ एक खास रत्न होता है। मान्यता है कि अगर सही तरीके से इन्हें धारण किया जाए तो इसका शुभ फल जरूर मिलता है। ऐसा ही एक रत्न है जिसका संबंध केतु रत्न से माना जाता है। इस रत्न का नाम लहसुनिया है और इसे कैट्स आई के नाम से भी जाना जाता है। अपनी अलग सी चमक के लिए मशहूर लहसुनिया रत्नशास्त्र की दुनिया में काफी पावरफुल माना जाता है। शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में केतु कमजोर या फिर अशुभ स्थिति में होते हैं तो ऐसे लोगों को लहसुनिया जरूर धारण करना चाहिए। हालांकि ये काफी असरदार होता है इसलिए इसे पहनने से पहले किसी जानकार ज्योतिषी की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
इन लोगों के लिए शुभ होता है लहसुनिया
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में केतु की महादशा या फिर अंतर्दशा चल रही होती है उनके लिए लहसुनिया काफी फायदेमंद माना जाता है। वहीं अगर केतु की वजह से बार-बार चीजें अटक जाती है या फिर मन बैचेन रहता है तो ज्योतिषी की सलाह लेकर इसे धारण किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष जैसी स्थिति है उनके लिए भी लहसुनिया फायदेमंद माना जाता है। राशि की बात करें तो वृषभ से लेकर मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के जातक इस रत्न को धारण कर सकते हैं। हालांकि ये फैसला ज्योतिषी की सलाह पर ही लेनी चाहिए क्योंकि कुंडली में कई और चीजें भी मायने रखती हैं।
लहसुनिया पहनने से मिलेंगे ये फायदे
1. सही तरीके से पहना जाए तो लहसुनिया केतु के अशुभ प्रभाव को कम कर सकता है।
2. लहसुनिया कॉन्फिडेंस को बूस्ट अप करता है।
3. मान्यता है कि लहसुनिया को धारण करने से मानसिक तनाव भी कम होता है।
4. इस रत्न की मदद से फैसले लेने की क्षमता भी मजबूत होती है।
5. लहसुनिया की मदद से नेगेटिव एनर्जी काफी हद तक कम होने की मान्यता है।
लहसुनिया धारण करने का सही तरीका
रत्नशास्त्र के अनुसार लहसुनिया को हमेशा चांदी या फिर पंचधातु में ही जड़वाकर पहनना शुभ माना जाता है। नियम के अनुसार लहसुनिया को हमेशा दाहिने हाथ की मध्यमा यानी कि बीच वाली उंगली में ही धारण करना चाहिए। मान्यता है कि इस रत्न को अगर शनिवार के दिन धारण किया जाए तो ये और भी अच्छा माना जाता है। इस रत्न को धारण करने से पहले गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध कर लेना चाहिए। इस दौरान ॐ कें केतवे नमः मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


