
यहां पढ़ें देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की आरती हिंदी में
भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने ऑफिस और दुकान, कारखाने आदि में पूजा करते हैं। इन्हे देवताओं के शिल्पी, वास्तुकार कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यमपुरी, आदि का निर्माण इन्होंने ही किया है। भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित की जाती है, उन्हें भोग लगाकर फल-फूल अर्पित किए जाते हैं
भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने ऑफिस और दुकान, कारखाने आदि में पूजा करते हैं। इन्हे देवताओं के शिल्पी, वास्तुकार कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यमपुरी, आदि का निर्माण इन्होंने ही किया है। भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित की जाती है, उन्हें भोग लगाकर फल-फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही उनकी आरती उतारी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि विश्वकर्मा जी की पूजा से बिजनेस और व्यापार दिन-दूनी रात चौगनी उन्नति होती है। यहां पढ़ें भगवान विश्वकर्मा जी आरती।
भगवान विश्वकर्मा की आरती
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा । ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।





