कल या परसों कब है विश्वकर्मा पूजा? जानें डेट, पूजन मुहूर्त, विधि, सामग्री लिस्ट और आरती
Vishwakarma puja 2026 Date: हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा अत्यंत शुभ मानी गई है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कामकाज से जुड़ी दिक्कतें दूर होती हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। जानें इस बार विश्वकर्मा पूजा कब है।

Vishwakarma puja 2026 Puja Muhurat: हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। हर साल यह पर्व कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने ही देवलोक, स्वर्ण लंका, भगवान कृष्ण की द्वारका नगरी और देवताओं के दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। इस दिन मशीनों, वाहनों और लोहे-स्टील के औजारों की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन यंत्रों के पूजन से व्यापार में समृद्धि आती है और काम में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। जानें इस बार 16 या 17 सितंबर कब मनाया जाएगा विश्वकर्मा पूजा का त्योहार।
विश्वकर्मा पूजा कब है:
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह पर्व सूर्य के सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करने (कन्या संक्रांति) के दिन मनाया जाता है। 17 सितंबर की सुबह 04:28 बजे कन्या संक्रांति का क्षण होगा, जिसके कारण यह समय बेहद शुभ माना जा रहा है। इस समय सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में आएंगे।
विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त 2026:
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:58 बजे से सुबह 06:44 बजे तक।
प्रातः सन्ध्या- सुबह 06:21 बजे से सुबह 07:30 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01:20 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 03:50 बजे से शाम 04:40 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- रात 07:59 बजे से रात 08:23 बजे तक।
सायाह्न सन्ध्या- रात 07:59 बजे से रात 09:09 बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 07:30 बजे से शाम 04:23 बजे तक।
रवि योग- सुबह 07:30 बजे से शाम 04:23 बजे तक।
विश्वकर्मा पूजा सामग्री लिस्ट:
विश्वकर्मा पूजा में भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर, चौकी, घी, इत्र, रोली, चंदन, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इचायची, कपूर, जनेऊ, गंगाजल कलश, फल, फूल, मिठाई, नारियल, रोली, अक्षत (चावल), और कलावा आदि मुख्य रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं।
विश्वकर्मा पूजा विधि:
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद कार्यस्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें। अब एक चौकी में लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं और अष्टदल कमल बनाकर एक कलश और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद सभी यंत्रों व औजारों पर रोली, चंदन और हल्दी लगाकर धूप-दीप से आरती उतारें। भगवान विश्वकर्मा को फल, फूल और मिठाई आदि का भोग लगाएं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और परिवारजनों में वितरित करें।
भगवान विश्वकर्मा की आरती:
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।


