
आज है विघ्नेश्वर चतुर्थी, भद्रा और पंचक भी, अगले साल कब होगी सकट चौथ, माताएं रखेंगी व्रत
Vinayak chaturthi :पौष मास की चतुर्थी को भक्तिपूर्वक विघ्नेश्वर चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण होता है। इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी इसलिए कहते हैं कि इस दिनव्रत करने से भगवान गणेश सभी विघ्नों को हर लेते हैं।
पौष मास की चतुर्थी को भक्तिपूर्वक विघ्नेश्वर चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण होता है। इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी इसलिए कहते हैं कि इस दिनव्रत करने से भगवान गणेश सभी विघ्नों को हर लेते हैं। इस व्रत में सुबह स्नान करें और साफ वस्त्र पहनकर भगवान गणेश को प्रार्थना करें। व्रत खोलने से पहले एक ब्राह्मण को लड्डू दें और भोजन कराएं, इसके बाद दक्षिणा दे। इस व्रत का उल्लेख नारद पुराण में मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि जो इस व्रत को करता है, उसको अपार धन-सम्पत्ति मिलती है। आज 24 दिसंबर को पौष मास की चतुर्थी का व्रत किया जा रहा है। इसके बाद माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आएगी। इसे संकट को हरने वाली सकट चौथ कहा गया है। इस व्रत में तिल का इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे तिलकुटा चौथ भी कहते हैं।
विघ्नेश्वर चतुर्थी पर बन रहे हैं गजब संयोग, जानें चंद्रोदय और चंद्रास्त कब?
आज साल की अंतिम विघ्नेश्वर चतुर्थी इस दिन पंचक के साथ भद्रा भी मिलेगी। आज भद्रा शाम सुबह 07:11बजे से है, वहीं शाम को 07:46 बजे से पंचक लग रहे हैं। इसके साथ ही आज धनिष्ठा नक्षत्र, विष्टि करण, हर्षण योग का भी संयोग रहेगा। विघ्नेश्वर चतुर्थी के दिन सुबह 11 बजकर 19 मिनट से दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक है, इस समय पूजा कर सकते हैं। चंद्रोदय का समय - सुबह 10 बजकर 16 मिनट से रात 9 बजकर 26 मिनट तक
इसके बाद नए साल संतान के लिए रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत
इस व्रत को महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। उपवासका संकल्प लेकर सुबह से चद्रोदयकाल तक नियमपूर्वक व्रत रखना पड़ता है। सकट चौथ 2026 में 6 जनवरी को मनाया जाएगा। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8:01 बजे से शुरू होगी और अगले दिन सुबह 7 जनवरी, 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। 6 जनवरी, 2026 को ही इसलिए यह व्रत किया जाएगा। इसके बाद रात को 9 बजे चंद्रमा उदय होगा। इस समय, भक्त चंद्र देव को जल, दूध या चावल मिश्रित जल अर्पित करते हैं। इसके बाद ही महिलाएं अपना व्रत तोड़ेंगी और संतान की लंबी उम्र की कामना करेंगी।
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