Ekadashi Vrat Niyam: एकादशी व्रत कैसे रखें? जानें प्रकार, नियम और सही तरीका
धर्म पुराणों में एकादशी व्रत को मोक्षदायी और पाप नाशक बताया गया है। 13 फरवरी 2026 को विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को चार मुख्य प्रकार से रखा जाता है। आइए जानते हैं एकादशी व्रत के प्रकार, नियम और सही तरीका।

एकादशी तिथि हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पवित्र तिथि मानी जाती है। हर महीने दो एकादशी पड़ती हैं – शुक्ल पक्ष में और कृष्ण पक्ष में। इस दिन विष्णु जी और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति बनी रहती है। धर्म पुराणों में एकादशी व्रत को मोक्षदायी और पाप नाशक बताया गया है। 13 फरवरी 2026 को विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को चार मुख्य प्रकार से रखा जाता है। आइए जानते हैं एकादशी व्रत के प्रकार, नियम और सही तरीका।
एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व
एकादशी व्रत रखने से मनुष्य के पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या हरि स्तोत्र का पाठ करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए लाभकारी है, क्योंकि ये जल तत्व की राशियां हैं और एकादशी का संबंध जल से जुड़ा है। व्रत करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
एकादशी व्रत के चार मुख्य प्रकार
एकादशी का व्रत चार प्रकार से रखा जाता है। व्यक्ति अपनी शक्ति और संकल्प के अनुसार कोई भी एक प्रकार चुन सकता है।
- जलाहर व्रत सबसे कठिन होता है। इस व्रत में दिन-रात केवल पानी ग्रहण किया जाता है। कोई भी ठोस या द्रव आहार नहीं लिया जाता। यह व्रत केवल तब रखा जाता है जब व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ और शारीरिक रूप से सक्षम हो। जलाहरी व्रत से विशेष पुण्य प्राप्ति होती है।
- क्षीरभोजी व्रत में केवल दूध या दूध से बने उत्पादों का सेवन किया जाता है। दही, मट्ठा, छाछ, पनीर, खीर आदि ग्रहण किए जा सकते हैं। यह व्रत मध्यम कठिनाई वाला होता है और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।
- फलाहारी व्रत सबसे सामान्य और लोकप्रिय है। इस व्रत में केवल फल, सूखे मेवे, नट्स और कुछ विशेष अनाज जैसे साबूदाना, सिंघाड़ा, शकरकंदी का सेवन किया जाता है। पत्तेदार सब्जियां, अनाज, नमक और तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित रहता है।
- नक्तभोजी व्रत में दिन भर उपवास रखा जाता है और सूर्यास्त के बाद एक बार फलाहारी भोजन ग्रहण किया जाता है। इसमें साबूदाना, शकरकंदी, आलू, मूंगफली आदि शामिल हो सकते हैं। अनाज, दाल और गेहूं-चावल से बनी चीजें नहीं खाई जाती हैं।
एकादशी व्रत के सामान्य नियम
एकादशी व्रत में अनाज, नमक, चावल, दाल, मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। सात्विक भोजन या फलाहार ही ग्रहण करें। क्रोध, झूठ, निंदा और नकारात्मक सोच से दूर रहें। रात्रि जागरण करना चाहिए। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करें। पारण में सात्विक भोजन या फल लें।
एकादशी व्रत से मन शुद्ध होता है। पाप नष्ट होते हैं। स्वास्थ्य में सुधार आता है। धन-समृद्धि और सुख-शांति मिलती है। पितृदोष से मुक्ति मिलती है। मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
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