Vijaya Ekadashi Vrat Katha hindi: विजया एकादशी व्रत में पढ़ते है यह कथा, श्री राम ने कलश के साथ ऐसे किया था एकादशी व्रत

Feb 13, 2026 04:11 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

Vijaya Ekadashi Vrat Katha kahani in hindi: विजया एकादशी व्रत महाशिवरात्रि से पहले किया जाता है। इस व्रत का संबंध भगवान श्री राम से है। इस व्रत में भगवान राम ने सीता जी को वापस लाने के लिए और समुद्र पार करने के लिए एकादशी व्रत विधि पूर्वक किया था।

Vijaya Ekadashi Vrat Katha hindi: विजया एकादशी व्रत में पढ़ते है यह कथा, श्री राम ने कलश के साथ ऐसे किया था एकादशी व्रत

vijaya ekadashi vrat katha lyrics in hindi:विजया एकादशी व्रत महाशिवरात्रि से पहले किया जाता है। इस व्रत का संबंध भगवान श्री राम से है। इस व्रत में भगवान राम ने सीता जी को वापस लाने के लिए और समुद्र पार करने के लिए एकादशी व्रत विधि पूर्वक किया था। यहां पढें एकादशी व्रत कथा

नारद मुनि ने कहा- हे ब्रह्माजी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उसकी विधि क्या है, मुझे इसके बारे में बताएं। ब्रह्माजी नी कहा-नारद -सुनों फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं। यह एकादशी पापों का नाश करनेवाली है। विजया नामकी एकादशी राजाओं को विजय प्रदान करती है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। बहुत पहले की बात है, भगवान्‌ श्रीरामचन्द्र जी चौदह वर्षों के लिए वन में गए और पंचवटी में माता सीता और लक्ष्मणके साथ रहने लगे। वहां रहते समय रावण ने चपलतावश श्रीरामकी तपस्विनी पत्नी सीता को हर लिया। उस दुःखसे श्रीराम व्याकुल हो उठे । उस समय सीताकी खोज करते हुए वे वन में घूमने लगे। कुछ दूर जानेपर उन्हें जटायु मिले, जिनकी आयु समाप्त हो चुको थी। इसके बाद उन्होंने वन के भीतर कई राक्षसों का वध किया। फिर सुग्रीव के साथ उनकी मित्रता हुई। तत्पश्चात्‌ श्रीराम के लिये वानरों की सेना बनी। हनुमानजी ने लंका के उद्यान में जाकर सीताजीका दर्शन किया ओर उन्हें श्रीरामकी चिहस्वरूप मुद्रिका दी।

वहां से वापस आकर वे श्रीरामचन्द्र जी से मिले और लंका की खबर बताई | हनुमानजीकी बात सुनकर श्रीरामने सुग्रीव की अनुमति से लंका पर प्रस्थान किया ओर समुद्रके किनारे पहुंचकर उन्होंने छक्ष्मण से कहा कि किस पुण्य से इस समुद्र को पार किया जा सकता हैं ? मुझे ऐसा कोई उपाय नहीं दिखायी देता, जिससे इसको सुगमता से पार किया जा सके। लक्ष्मण बोले- महाराज ! आप ही आदिदेव ओर पुराणपुरुष पुरुषोत्तम हैं। आपसे क्‍या छिपा है ? यहां द्वीप के भीतर बकदाल्भ्य नामक मुनि रहते हैं। थोड़ी दूरीपर उनका आश्रम है। उनके पास जाकर इसका उपाय पूछना चाहिए । ऐसा सोचकर वो महामुनि बकदाल्भ्य से मिलने के लिये गए। वहां पहुंचकर उन्होंने मस्तक झुकाकर मुनि को प्रणाम किया । उन्होंने पूछा कि श्रीराम - आपका कैसे यहां आगमन हुआ ? श्रीराम ने कहा कि आपकी कृपा से राक्षसों सहित लंका को जीतने के लिये सेना के साथसमुद्र पार किया जा सके, ऐसा कोई उपाय बताइये | मुझपर कृपा कीजिए।

पद्मपुराण में इस व्रत की विधि को श्रीराम को बताया गया था इस दिन दशमी का दिन आने पर एक कलश स्थापित करें। वह सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी का भी हो सकता है। उसे जल से भरकर उसमें पत्तें डाल दें| उसके ऊपर भगवान्‌ नारायण के विग्रह की स्थापना करें। फिर एकादशी के दिन प्रातःकाल स्त्रान करें। कलश को पुनः स्थिरतापूर्वक स्थापित करें। माला, चन्दन, सुपारी तथा नारियल आदि के द्वारा विशेषरूप से उसका पूजन करें। कलश के ऊपर सप्तधान्य और जौ रखें | गंध, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजन करें। कलशके सामने बैठकर वह सारा दिन उत्तम कथा-आदिके साथ समय बिताएं, रात में भगवान श्रीहरि का जागहरण करें। अगर अखंड व्रत करना चाहते हैं, तो घी का दीपक जलाएं । फिर द्वादशीके दिन सूर्योदय होने पर उस कलश को किसी जलाशय के पास नदी -झरने या पोखरे में स्थापित करे और उसकी विधिवत्‌ पूजा करके देव-प्रतिमा सहित उस कलशको ब्राह्मण को दान कर दें। कलश के साथ ही और भी दान देने चाहिए। इसकी कथा को पढ़नें और और सुनने से वाजपेय यज्ञका फल मिलता है। विजया एकादशी के दिन ऐसा करने से आपकी विजय होगी। ब्रह्माजी कहते हैं-नारद श्रीरामचन्द्रजी ने मुनि के कहे अनुसार विजया एकादशीका ब्रत किया । उस ब्रतके करने से श्रीरामचन्द्रजी विजयी हुए। उन्होंने रावण को मारा, लंका पर विजय पाई ओर सीताको पाया । जो भी इस विधि से इस व्रत करते हैं, उन्हें इस लोक में विजय प्राप्त होती है ओर उनका परलोक भी अक्षय बना रहता है। इत श्री विजया एकादशी कथा संपन्न

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!