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विजया एकादशी पर भूलकर भी ना करें ये 8 कार्य, भगवान विष्णु हो जाते हैं नाराज, चली जाती है सुख-समृ्द्धि

विजया एकादशी पर भूलकर भी ना करें ये 8 कार्य, भगवान विष्णु हो जाते हैं नाराज, चली जाती है सुख-समृ्द्धि

संक्षेप:

एकादशी के दिन तुलसी का खास महत्व होता है। इस दिन इस पौधे की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। एकादशी की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग किया जाता है। लेकिन कई बार लोग एकादशी के दिन ही तुलसी के पत्ते तोड़ते हैं। चलिए जानते हैं इस दिन क्या ना करें।

Feb 12, 2026 02:30 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हर महीने दो बार एकादशी आती है, पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस तरह पूरे साल में कुल 24 एकादशी आती हैं। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है, जो इस साल 13 फरवरी 2026 को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की सच्चे मन से पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कहते हैं कि भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी विजया एकादशी का व्रत किया था। अगर कोई इस एकादशी का व्रत करता है, तो उसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही हर एक कार्य में सफलता मिलती। लेकिन विजया एकदशी पर कुछ कार्य हैं, जिन्हें करने की मनाही होती है। मान्यता है कि इस दिन की गई गलतियों से भगवान नाराज हो जाते हैं और पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। चलिए जानते हैं कि इस दिन कौन से कार्य नहीं करने चाहिए।

तुलसी से जुड़ी गलतियां ना करें
एकादशी के दिन तुलसी का खास महत्व होता है। इस दिन इस पौधे की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। एकादशी की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग किया जाता है। तुलसी मिश्रित कच्चे दूध से विष्णु जी का अभिषेक किया जाता है। लेकिन कई बार लोग एकादशी के दिन ही तुलसी के पत्ते तोड़ते हैं, जिसे गलत माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी के पत्तियों को नहीं तोड़ना चाहिए। इससे तुलसी नाराज हो जाती है। जिस घर में तुलसी की विधि-विधान से पूजा होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में अगर वो नाराज हो जाएंगी, तो घर से सुख-चैन तक चला जाएगा। ऐसे में अगर आपको एकादशी पूजन के लिए तुलसी के पत्ते चाहिए, तो उसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

तुलसी को जल ना करें अर्पित
इसके अलावा लोग दूसरी और सबसे बड़ी गलती करते हैं कि एकादशी के दिन तुलसी को जल अर्पित कर देते हैं। मान्यतानुसार, एकादशी पर तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैंष ऐसे में तुलसी पर जल अर्पित करने पर तुलसी माता का व्रत टूट सकता है। ऐसे में इस दिन गलती से भी तुलसी को जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

देर तक न सोएं
विजया एकादशी के दिन देर तक सोने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर रात में भी नहीं सोना चाहिए। पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की भक्ति, मंत्र जप और भजन करना चाहिए। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है ।

पान नहीं खाना चाहिए
अगर आप विजया एकादशी के दिन व्रत रखते हैं, तो इस दिन पान खाना भी वर्जित माना गया है। पान खाने से मन में रजोगुण की प्रवृत्ति बढ़ती है, इसलिए एकादशी के दिन पान न खा कर व्यक्ति को सात्विक आचार-विचार रख प्रभु भक्ति में मन लगाना चाहिए ।

बुराई और हिंसा ना करें
एकादशी के दिन व्रती को अपना पूरा ध्यान भगवान पर लगाना चाहिए। इस दिन दूसरों की बुराई करने से पाप लगता है। ऐसे में साधक को जीवन में कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। यहां तक इस दिन किसी तरह का हिंसा करना महापाप माना गया है । हिंसा केवल शरीर से ही नहीं मन से भी होती है। इससे मन में विकार आता है।

झूठ नहीं बोलना चाहिए
झूठ बोलना व्यक्तिगत बुराई है। जो लोग झूठ बोलते हैं, वो भी महापाप की श्रेणी में आता है। इसलिए इस दिन इन कार्यों से दूर रहें। इन सब चीजों के बजाया लोगों की भलाई करें। साथ ही मन अच्छे विचार लाएं। इससे जीवन को सकारात्मक दिशा भी मिलेगा।

क्या ना खाएं
जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें सिर्फ सात्विक चीजों को ही ग्रहण करना चाहिए। भूलकर भी इस दिन तामसिक चीजों जैसे मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज आदि का सेवन न करें। इसके अलावा व्रत में मसूर की दाल, चना की दाल, उड़द की दाल, गाजर, शलजम, पालक आदि भी नहीं खाना चाहिए।

सही दिशा में करें पूजा
एकादशी व्रत की पूजा सही दिशा में करना शुभ फलदायी होता है। एकादशी व्रत की पूजा ईशान कोण में पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके करनी चाहिए। भूलकर भी दक्षिण दिशा की ओर करके भगवान विष्णु की पूजा करने की गलती ना करें। इससे पूजा का कोई फल नहीं मिलता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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