Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर करें इन चीजों का दान, बढ़ेगी सुख और समृद्धि

Feb 11, 2026 11:36 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Vijaya Ekadashi 2026 Daan: इस साल विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। इस दान दान करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में चल रही समस्याओं का भी अंत होता है। लेकिन इस दिन दान करने के कुछ नियम भी है। चलिए जानते हैं कि इस दिन क्या दान करें और कैसे करें।

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर करें इन चीजों का दान, बढ़ेगी सुख और समृद्धि

हिंदू धर्म में विजया एकादशी का विशेष महत्व होता है। फाल्गुन का महीना चल रहा है, और इस माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकदाशी कहा जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत का विधान है। इस साल विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। व्रत के साथ इस दान पुण्य करना भी शुभलाकारी होता है। इस दिन दान करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में चल रही समस्याओं का भी अंत होता है। लेकिन इस दिन दान करने के कुछ नियम भी है। चलिए जानते हैं कि इस दिन क्या दान करें और कैसे करें।

पीले वस्त्र का दान
विजया एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र का दान करना बेहद शुभ होता है। इन वस्त्रों को आप किसी गरीब या जरूरत मंद को दें। कहा जाता है कि इससे व्यक्ति को अपार धन-दौलत का सौभाग्य प्राप्त होता है और सभी रोग-दोष भी दूर होते हैं। साथ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन में आने वाले सभी समस्याएं भी दूर हो सकती है।

चावल का दान
विजया एकादशी के दिन चावल का दान भी कर सकते हैं। इस दिन चावल का दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है। साथ ही व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

देसी घी का दान
विजया एकादशी के दिन घी का दान जरूर करें। इससे व्यक्ति के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। साथ ही जातक के कुंडली में शुक्र और गुरु की स्थिति मजबूत होती है। ये दोनों सौभाग्य के कारक माने जाते हैं। इसलिए आप दान विशेष नियम के साथ करें।

धार्मिक पुस्तकों का दान
विजया एकादशी के दिन श्रीमद्भगवद्गीता या विष्णु सहस्रनाम जैसी धार्मिक पुस्तकें दान करें। इससे आपके जीवन की सारे परेशानिया खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

तिल और गुड़ का दान
विजया एकादशी के दिन तिल और गुड़ का दान कर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है। साथ ही शनि के दोषों को कम किया जा सकता है। काले तिल का दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

विजया एकादशी पर क्या दान ना करें
- इस दिन आप लोहे का दान बिल्कुल ना करें।
- विजया एकादशी पर काले वस्त्र का दान ना करें।
- इस दिन नुकीली चीजें, जैसे कि सुई, चाकू, कैंची का दान भी नहीं करना चाहिए।
- दान कभी भी किसी दबाव में नहीं देना चाहिए।
- दान कभी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए जो कुपात्र हो और जो भी वस्तुएं दान में दी जाएं, वो उत्तम कोटि की हों।
- दान देते समय मन में हमेशा ये भाव रखें कि ये वस्तु ईश्वर की दी हुई है और ये सेवा या दान मैं भगवान को ही समर्पित कर रहा हूं।

व्रत का विधान
विजया एकादशी के दिन व्रत रखने का विधान है। इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नष्ट होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन व्रत रखने से साधक को हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले विजया एकादशी का व्रत रखा था। इसलिए इस व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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