Vijaya Ekadashi 2026: भगवान राम ने भी रखा था विजया एकादशी का व्रत, जानिए इसकी पूरी कथा

Feb 06, 2026 12:43 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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विजया एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में इस एकादशी का विस्तृत वर्णन मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वयं भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले इस व्रत को किया था।

Vijaya Ekadashi 2026: भगवान राम ने भी रखा था विजया एकादशी का व्रत, जानिए इसकी पूरी कथा

विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत विजय, सफलता और शत्रुओं पर जीत का प्रतीक है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में इस एकादशी का विस्तृत वर्णन मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वयं भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले इस व्रत को किया था। इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को जीवन में हर प्रकार की विजय प्राप्त होती है। 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी, दिन शुक्रवार को रखी जाएगी। आइए जानते हैं इसकी पूरी कथा, महत्व और पूजा विधि।

विजया एकादशी की कथा और भगवान राम का व्रत

रामायण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे, तो सामने विशाल और भयंकर समुद्र था। उसमें खतरनाक जल जीव थे और पार करने का कोई आसान रास्ता नहीं दिख रहा था। श्रीराम चिंतित हो गए और लक्ष्मण से बोले कि समुद्र पार करने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा। लक्ष्मण ने कहा कि पास ही मुनि बकदाल्भ्य का आश्रम है, जो बहुत ज्ञानी हैं। उनसे मार्गदर्शन लें।

श्रीराम मुनि के आश्रम पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया। मुनि ने श्रीराम को पहचानकर प्रसन्न होकर स्वागत किया। जब श्रीराम ने समुद्र पार करने का उपाय पूछा, तो मुनि बकदाल्भ्य ने कहा कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने से निश्चित रूप से विजय प्राप्त होगी। मुनि ने विधि बताई कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है। श्रीराम ने मुनि की आज्ञा मानकर विजया एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से वे वानर सेना के साथ समुद्र पार करने में सफल हुए, रावण का वध किया और माता सीता को वापस लाए। इस कथा से सिद्ध होता है कि विजया एकादशी का व्रत शत्रु विजय और सफलता का सर्वोत्तम साधन है।

विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

पद्म पुराण में कहा गया है कि विजया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को विजय, सुख, समृद्धि और शत्रुओं पर जीत प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से भय से मुक्ति मिलती है और सभी कार्य सफल होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिन्हें जीवन में बाधाएं, शत्रुता या असफलता का सामना करना पड़ रहा है। व्रत से पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल मिलता है।

विजया एकादशी 2026 की तिथि और मुहूर्त

2026 में फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी को सुबह 11:32 बजे शुरू होगी और 13 फरवरी को दोपहर 1:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए सबसे शुभ है। पारण 14 फरवरी को सुबह 7:00 से 9:14 बजे तक किया जाएगा।

विजया एकादशी व्रत और पूजा विधि

व्रत विधि सरल है:

  • सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने आसन लगाएं।
  • कलश स्थापित कर गंगाजल, फूल, अक्षत, चंदन से पूजा शुरू करें।
  • भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, चने की दाल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • विष्णु सहस्रनाम या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।
  • शाम को दीपक जलाकर आरती करें और कथा सुनें।
  • दूसरे दिन द्वादशी में पारण करें।

विजया एकादशी व्रत से जीवन में विजय और सुख प्राप्त होता है। विधि-विधान से व्रत रखें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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