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Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर भगवान विष्णु को लगाएं इन चीजों का भोग, मिलेगी विशेष कृपा

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर भगवान विष्णु को लगाएं इन चीजों का भोग, मिलेगी विशेष कृपा

संक्षेप:

विजया एकादशी कल है। फरवरी के महीने में पड़ने वाली ये पहली एकादशी है। इस खास दिन पर भगवान विष्णु का भोग भी खास होना चाहिए। जानिए इस एकादशी व्रत से जुड़े हर एक डिटेल के बारे में…

Feb 12, 2026 09:10 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Vijaya Ekadashi 2026 Vrat and Bhog Details: हिंदू धर्म में कई ऐसे तीज-त्योहार आते हैं जिनका विशेष महत्व होता है। इन्हीं में से एक है एकादशी का व्रत जिसे काफी पवित्र और फलदायी माना जाता है। हर महीने एकादशी दो बार पड़ती है। एक एकादशी कृष्ण पक्ष में आती है तो दूसरी वाली शुक्ल पक्ष में पड़ती है। इस खास दिन पर भगवान विष्णु की पूजा होती है। माना जाता है कि अगर इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखा जाए और पूजा की जाए तो भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है और हर मनोकामना पूरी होती है। उनके आशीर्वाद से जिंदगी में आने वाली हर बाधा खत्म हो जाती है। फरवरी के महीने में विजया और आमलकी एकादशी पड़ती है। आज जानेंगे विजया एकादशी के बारे में। साथ में जानेंगे कि इस दिन भगवान विष्णु को किन चीजों का भोग लगाना फलदायी माना जाता है।

इस दिन है विजया एकादशी

पंचांग कैलेंडर के अनुसार फरवरी महीने में पड़ने वाली पहली एकादशी 13 फरवरी यानी कल है। विजया एकादशी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह ur है। सुबह 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 9 बजकर 15 तक पूजा का मुहूर्त रहेगा। बता दें कि एकादशी की पूजा बिना पारण के कभी भी पूरी नहीं होती है। इस व्रत का पारण अगले दिन यानी 14 फरवरी को होगा।

विजया एकादशी पर लगाएं ये भोग

इस खास दिन पर भगवान विष्णु को कुछ विशेष चीजों का भोग लगाना चाहिए। उन्हें पंचामृत का भोग जरूर लगाएं। माना जाता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और बरकत आती है। इसके अलावा सूखे मेवे, फल और खीर भोग में जरूर रखें। इसके अलावा फूल और चंदन पूजा में शामिल करें। आप चाहे तो भगवान विष्णु को पीले रंग के कपड़े भी चढ़ा सकते हैं। इसके अलावा उनका भोग बिना तुलसी के अधूरी है। दरअसल उन्हें ये बहुत प्रिय होता है। पूजा में इसे जरूर शामिल करें।

इस व्रत का खास महत्व

एकादशी का व्रत बहुत ही मायने रखता है। वहीं विजया एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इस व्रत का महत्व इसलिए होता है क्योंकि ये फाल्गुन के महीने में आती है। इस व्रत का संबंध भगवान राम से भी है। दरअसल उन्होंने रावण का वध करने से पहले इस व्रत को रखा था। यही वजह है कि इस एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के जरिए हमारे सारे पाप खत्म हो जाते हैं।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

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गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


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गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


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