Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री का व्रत मई में किस दिन है, पूजा की सामग्री क्या है?

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Vat Savitri Vrat 2026 kab hai: सौभाग्य, समर्पण और अटूट वैवाहिक बंधन अगर आप रखना चाहती हैं, तो वट सावित्री का व्रत बहुत खास माना जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाएगा। इस दिन शनि जयंती भी है।

Vat Savitri Vrat 2026:  वट सावित्री  का व्रत मई में किस दिन है, पूजा की सामग्री क्या है?

सौभाग्य, समर्पण और अटूट वैवाहिक बंधन अगर आप हमेशा के लिए पाना चाहती हैं, तो वट सावित्री का व्रत बहुत खास माना जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाएगा। इस दिन शनि जयंती भी है। इस दिन सुहागिन महिलाएं श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखती हैं। सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए भगवान से आशीर्वाद मांगती हैं।

कई पुराणों में इस व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है। सत्यवान और सावित्री की कथा का जिक्र भी आपको कई जगह मिल जाएगा। वट सावित्री व्रत कर महिलाएं पूजा व परिक्रमा से अखंड सुहाग, पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। वट सावित्री व्रत की पूजा और परिक्रमा के बाद कई चीजों का दान भी किया जाता है। कुछ दान सुहागिन महिलाएं अपनी सास या जेठानी आदि को करती हैं, पूजा में कच्चा सूत, बांस का पंखा, चावल, रौली, कलावा, धूप दीप, फल, फूल, साड़ी, श्रृंगार सामग्री और मौसमी फल बहुत जरूरी माने जाते है। इनमें सुहाग का सामान, कपड़े, अन्न, तिल और मौसमी फल आदि का दान करना उत्तम होता है। इस व्रत में वट वृक्ष की परिक्रमा करके कच्चा धागा बांधा जाता है। एक कच्चे धागे की सूत की माता अपने गले में भी पहनी जाती है। वट वृक्ष की पूजा के बाद पति को पंखा भी झला जाता है। अब बात करेंगे कि यह व्रत किस दिन है

कब रखा जाएगा व्रत

इस साल वट सावित्री व्रत 16 मई को मनेगा, इस दिन अमावस्या तिथि लग रही है। इसी दिन स्नान और दान की अमावस्या भी है। इस व्रत में महिलाएं सावित्री और सत्यवान की कथा का पाठ करती हैं। मान्यता है कि सावित्री ने अपनी अटूट निष्ठा, तप और दृढ़ संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिए थे। तभी से यह व्रत पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन अगर आपको वट का वृक्ष पूजा के लिए नहीं मिलता है, तो आप इसकी एकशाखा से भी पूजा कर सकती है। इसे किसी गमले में लगाकर आप इसके चारों ओर परिक्रमा कर सकती है। ऐसा कहा जाता है बड़ के पेड़ की उम्र बहुत लंबी मानी गई है। मान्यता है कि वट वृक्ष में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं, जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना गया है।

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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