Vat Savitri 2026 Mantra: बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय पढ़ें ये 3 मंत्र, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Vat Savitri 2026 Mantra: वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। यहां पढ़ें कि परिक्रमा करते समय कौन से 3 मंत्र पढ़ना शुभ माना जाता है?

Vat Savitri 2026 Mantra: बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय पढ़ें ये 3 मंत्र, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

15 मई का दिन बेहद खास है। इस दिन शनि जयंती मनाई जाएगी और इसी के साथ-साथ वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत का कनेक्शन देवी सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अटूट विश्वास और तपस्या के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। तभी से इस व्रत को अखंड सौभाग्य और सुखी शादीशुदा जिंदगी का प्रतीक माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की पूजा और व्रत करने पर सुहागिन महिलाओं को सुख-समृद्धि, पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का वरदान मिलता है। वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा का भी इस दिन विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान कुछ मंत्रों का जाप करना जरूरी होता है।

वट सावित्री पर खास मंत्रों का जाप

वट सावित्री की पूजा में सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं। मान्यता के हिसाब से ये परिक्रमा 7 बार करनी चाहिए। वहीं कुछ लोग अपनी श्रद्धा के हिसाब इससे ज्यादा परिक्रमा भी करती हैं। बरगद के पेड़ की परिक्रमा करने के पीछे मान्यता है कि इससे शादीशुदा जिंदगी में आने वाली सारी बाधाएं खत्म हो जाती हैं। वहीं इस दौरान कुछ खास मंत्रों का जाप करना भी बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इन मंत्रों से पूजा का फल और बढ़ जाता है।

बरगद की परिक्रमा करते समय पढ़ें ये 3 मंत्र

1. ॐ नमो वट वृक्षाय नमः

मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस मंत्र का जाप शादीशुदा जिंदगी में आने वाली हर परेशानी को हर लेता है।

2. ॐ सावित्र्यै नमः

वट सावित्री के व्रत से जुड़ा ये मंत्र देवी सावित्री को समर्पित माना जाता है। इस मंत्र में इतनी ताकत बताई जाती है कि अगर सच्चे मन से इसका जाप किया जाए तो शादीशुदा जिंदगी में प्यार और विश्वास दोनों ही बढ़ता जाता है।

3. वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमैः।

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।

तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा।।

इस मंत्र को सुहागिन महिलाएं तब बोलती है जब बरगद के पेड़ पर जल अर्पित किया जाता है। इस मंत्र के जरिए सुहागिन महिलाएं अपने सुखी परिवार, संतान सुख, सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से इसका जाप करने पर घर में खुशहाली बनी रहती है।

पूजा के समय रखें इन बातों का ध्यान

वट सावित्री व्रत के दिन सच्चे मन और श्रद्धा के साथ पूजा की शुरुआत करें। मन शांत रखें। बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते वक्त जल्दबाजी ना करें। अगर पूजा से जुड़ी किसी भी तरह की भूल हो जाती है तो पूजा के आखिरी में भूल-चूक के लिए माफी मांग लें।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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