
बछड़े वाली गाय को रखने से आर्थिक बाधाएं होती हैं कम, कामधेनु की मूर्ति वहां रखें, जहां सभी को दिखे
गौसेवा और गोदान के लाभ तो आपको बता ही होंगे, शिवपुराण एवं स्कन्दपुराण में कहा गया है कि गौसेवा और गोदान से यम का भय नहीं रहता। इसी तरह वास्तु के अनुसार भी गाय का बहुत अधिक महत्व है।
गौसेवा और गोदान के लाभ तो आपको बता ही होंगे, शिवपुराण एवं स्कन्दपुराण में कहा गया है कि गौसेवा और गोदान से यम का भय नहीं रहता। इसी तरह वास्तु के अनुसार भी गाय का बहुत अधिक महत्व है। वहीं अधिकतर लोग घर में कामधेनु की बछड़े के साथ मूर्ति भी लगाते हैं, ऐसा भी कहा जाता है कि जिस घर में गाय और बछड़ा होते हैं और उनकी सेवा की जाती है, वहां पॉजिटिव एनर्जी होती है। आइए जानें वास्तु में गाय को क्यों बहुत खास माना गया है।
वास्तु दोष दूर करती है गाय
अग आप कहीं घर बनवाने जा रहे हैं, तो आपको उस जगह पर बछड़े वाली गाय को लाकर बांधना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि उस भूमि के वास्तु दोष इससे अपनेआप समाप्त हो जाते हैं। इससे आपका काम बिना किसी विघ्न के पूरा होता है और आर्थिक बाधाएं नहीं आतीं हैं। वास्तु के अनुसार भवन निर्माण का शुभारंभ करने से पहले उस भूमि पर ऐसी गाय को लाकर बांधते हैं, तो नवजात बछड़े को जब गाय दुलारकर चाटती है तो उसका फेन भूमिपर गिरकर उसे पवित्र बनाता है। उससे वहां के सभी दोषों का निवारण हो जाता है।
वास्तु के अनुसार घर में लगाते हैं कामधेनु की मूर्ति
अधिकतर लोगों के घर में कामधेनु की मूर्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि इस मूर्ति को घर में ऐशी जगह लगाना चाहिए, जहां से यह सभी को दिखाई दे। इससे आपके घर में पॉजिटिविटी रहती है। दिशा की बात करें तो इसे उत्तर-पूर्व कोने यानी ईशान कोण में रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार आप घर के मुख्य द्वार पर भी कामधेनु की मूर्ति या फिर तस्वीर लगा सकते हैं। पीतल, तांबा, चांदी या सोने से बनी कामधेनु गाय की मूर्ति रखना शुभ मानी जाती हैं। लेकिन आपको इस बात को भी समझना होगा कि मूर्ति में बछड़ा भी जरूर होना चाहिए। वरना आपको इसका लाभ नहीं मिलेगा।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





