Vastu Tips Home: दक्षिण दिशा में है मुख्य दरवाजा तो करें ये उपाय, दूर होगा वास्तु दोष

Apr 02, 2026 02:28 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Vastu Tips for Home: कई लोग दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार को अशुभ मानते हैं, लेकिन हर स्थिति में ऐसा नहीं होता। कुछ खास परिस्थितियों में इसके नकारात्मक प्रभाव कम या समाप्त भी हो सकते हैं। यदि दक्षिण दिशा में मुख्य दरवाजा हो, तो कुछ जरूरी वास्तु नियमों का पालन करके उसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।

Vastu Tips Home: दक्षिण दिशा में है मुख्य दरवाजा तो करें ये उपाय, दूर होगा वास्तु दोष

वास्तु शास्त्र में घर की हर एक दिशा का महत्व बताया गया है। वास्तु कहता है कि अगर घर सही दिशा में बना हो या उसमें रखी चीजों की दिशा सही हो, तो उस घर में हमेशा खुशहाली और सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा घर का मुख्य दरवाजा, खिड़कियां और बालकनी की दिशा घर के सुख-समृद्धि पर असर डालती है। इसलिए लोग इन्हें वास्तु के हिसाब से ही बनवाते हैं। कई लोग दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार को अशुभ मानते हैं, लेकिन हर स्थिति में ऐसा नहीं होता। कुछ खास परिस्थितियों में इसके नकारात्मक प्रभाव कम या समाप्त भी हो सकते हैं। यदि दक्षिण दिशा में मुख्य दरवाजा हो, तो कुछ जरूरी वास्तु नियमों का पालन करके उसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। चलिए इससे जुड़े कुछ उपायों के बारे में जानते हैं।

दक्षिण दिशा क्यों है अशुभ

वास्तु के मुताबिक घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। क्योंकि मुख्य द्वार घर का अहम हिस्सा माना जाता है। यहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए मुख्य द्वार का विशेष ख्याल रखा जाता है। वास्तु के मुताबिक दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है। इसका प्रभाव घर पर बेहद अशुभ पड़ता है। इससे लगातार घर-परिवार में आर्थिक, शारीरिक और मानसिक कष्ट बना रहता है।

मुख्य द्वार के लिए सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार उत्तर-पूर्व दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश ऐसा संभव न हो, तो दक्षिण-पूर्व दिशा में भी मुख्य प्रवेश द्वार बनवाया जा सकता है। हालांकि, इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मुख्य द्वार कभी भी दक्षिण-पश्चिम दिशा में न हो। मान्यता है कि सही दिशा में बना मेन गेट परिवार के जीवन पर सकारात्मक असर डालता है और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखता है।

दक्षिण दिशा के लिए वास्तु उपाय

गणेश जी का चित्र
यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है, तो प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश का चित्र अवश्य लगवाना चाहिए। मान्यता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता होते हैं, जो सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर घर में सुख और शांति बनाए रखते हैं।

स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं
यदि घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है, तो दरवाजे के दोनों ओर दीवारों पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है। चाहें तो मुख्य द्वार पर चांदी का स्वास्तिक भी लगा सकते हैं। स्वास्तिक को सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाएं
मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाने से वास्तु दोष दूर होते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और भगवान हनुमान परिवार की रक्षा करते हैं।

कैक्टस का पौधा रखें
अगर घर दक्षिणमुखी है, तो मुख्य द्वार के पास कैक्टस का पौधा रखना लाभकारी माना जाता है। यह कांटेदार पौधा नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से घर की रक्षा करने में सहायक होता है।

शीशा लगाएं
यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है, तो दरवाजे के ठीक सामने वाली दीवार पर एक बड़ा शीशा लगाना लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से माना जाता है कि दरवाजा खुलते ही आने वाली नकारात्मक ऊर्जा शीशे से टकराकर वापस लौट जाती है।

मुख्य द्वार से जुड़ी खास बातें

1. वास्तु के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर एक नेम प्लेट हमेशा लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि यह घर में अच्छा स्वास्थ्य, धन, सुख और समृद्धि को बढ़ावा देता है।

2. वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार के सामने बिजली का खंभा या पेड़ होना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है की इन चीजों की छाया घर के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

3. वास्तुशास्त्र में दो पल्ले वाले दरवाजे को अधिक शुभ माना जाता है। साथ ही, मुख्य द्वार पर लगे गेट घर के बाकी दरवाजों से बड़े होने चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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