वास्तु टिप्स: मुख्य द्वार के सामने नहीं होने चाहिए ये 10 चीजें, तरक्की की राह में आ जाती है रुकावटें

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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घर बनवाते समय मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियमों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, ताकि किसी प्रकार का वास्तु दोष उत्पन्न न हो। इसके अलावा, मुख्य द्वार के आसपास रखी गई चीजें भी घर के माहौल और परिवार के सदस्यों पर असर डालती हैं।

वास्तु टिप्स: मुख्य द्वार के सामने नहीं होने चाहिए ये 10 चीजें, तरक्की की राह में आ जाती है रुकावटें

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद खास स्थान दिया गया है। इसे सही दिशा और उचित स्थान पर बनाना जरूरी माना जाता है, क्योंकि यही वह जगह है जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। मान्यता के अनुसार, इसी द्वार से माता लक्ष्मी का भी आगमन होता है, जो सुख-समृद्धि का संकेत है। ऐसे में घर बनवाते समय मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियमों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, ताकि किसी प्रकार का वास्तु दोष उत्पन्न न हो। इसके अलावा, मुख्य द्वार के आसपास रखी गई चीजें भी घर के माहौल और परिवार के सदस्यों पर असर डालती हैं। ऐसे में घर के मुख्य द्वार के सामने कुछ चीजें नहीं रखनी चाहिए। चलिए जानते हैं कि वास्तु के मुताबिक मुख्य द्वार के सामने क्या नहीं रखना चाहिए।

मुख्य द्वार के सामने क्या नहीं होना चाहिए

सड़क नहीं होना चाहिए
घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने सीधा रास्ता यानी सड़क नहीं होना चाहिए, इसे अशुभ माना जाता है और यह जीवन में बाधाएं ला सकता है।

कीचड़ नहीं होना चाहिए
मुख्य द्वार के सामने गड्ढा, पानी जमा होना या कीचड़ नहीं होना चाहिए, इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

नाला नहीं होना चाहिए
घर के प्रवेश द्वार के सामने नाला या गंदी जलधारा होना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

कुंआ नहीं होना चाहिए

यदि मुख्य द्वार के सामने कुआं हो, तो इसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जोड़ा जाता है।

खंभा नहीं होना चाहिए

मुख्य द्वार के सामने खंभा (स्तंभ) होना भी शुभ नहीं माना जाता, यह घर की महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

मंदिर नहीं होना चाहिए

घर के ठीक सामने मंदिर होना भी वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता, इससे मानसिक तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं।

सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए

मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए, इससे ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित होता है।

ऊपर द्वार नहीं होना चाहिए

एक द्वार के ठीक ऊपर दूसरा द्वार होना भी वास्तु दोष माना जाता है, जो धन हानि का कारण बन सकता है।

पेड़ नहीं होना चाहिए

घर पर पड़ने वाली छाया का भी प्रभाव होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि छाया किस वस्तु की है, किस दिशा से और किस समय पड़ती है। मुख्य द्वार के सामने बड़ा पेड़ नहीं होना चाहिए, इससे कार्यों में रुकावटें आती हैं और पारिवारिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।

छोटा दरवाजा ना हो

वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि घर का मुख्य द्वार पीछे के दरवाजे से छोटा होता है तो इसे अशुभ माना जाता है। ऐसी स्थिति में घर में आर्थिक समस्याएं बनी रह सकती हैं और आय-व्यय का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे धन संचय करना मुश्किल हो सकता है।

मेन गेट लिए सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा में होना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में भी मेन गेट बनवा सकते हैं। इस दिशा को मुख्य द्वार के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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