Vastu Shastra: दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए? भूलकर भी ना करें ये गलतियां, जानें वास्तु नियम

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु के लिए शुभ और अशुभ दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। जब चीजें सही दिशा में रखी जाती हैं, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। हर दिशा का अपना अलग महत्व और देवता माने गए हैं।

Vastu Shastra: दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए? भूलकर भी ना करें ये गलतियां, जानें वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु के लिए शुभ और अशुभ दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। जब चीजें सही दिशा में रखी जाती हैं, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। हर दिशा का अपना अलग महत्व और देवता माने गए हैं। इसी तरह दक्षिण दिशा को वास्तु में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, जिसके स्वामी यमराज बताए गए हैं। इसलिए इस दिशा से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होता है। मान्यता है कि जैसे दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोने से शरीर की ऊर्जा प्रभावित होती है, वैसे ही घर के दक्षिण भाग में मुख्य द्वार या पानी से जुड़ी व्यवस्था होने पर घर के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में किन चीजों को रखने से बचना चाहिए।

शौचालय नहीं होना चाहिए

दक्षिण दिशा में किसी भी प्रकार का खुलापन, शौचालय आदि नहीं होना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है। साथ ही घर के सदस्यों के बीच कलह की स्थिति बनी रहती है।

पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए

वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए।

स्विमिंग पूल भी न बनवाएं

साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं।

दक्षिण दिशा में मेन गेट

यदि इस दिशा में द्वार या खिड़की है तो घर में नकारात्मक ऊर्जा रहेगी और ऑक्सीजन का लेवल भी कम हो जाएग। इससे घर में क्लेश बढ़ता है।

पूजा घर

वास्तु के मुताबिक दक्षिण दिशा में पूजा घर भी नहीं बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है। साथ ही ऐसा करने से घर में नेगेटिव एनर्जी का संचार होने लगता है, जो व्यक्ति को बुरे प्रभाव दे सकता है।

रंग का चयन

दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है।

तुलसी का पौधा

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पूजनीय और पवित्र माना गया है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखें कि तुलसी का पौधा घर की दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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