
वास्तुशास्त्र: बार-बार सूख रहा है तुलसी का पौधा दे रहा है खतरे का संकेत? घर में करें ये उपाय
अगर आपके घर में बार-बार तुलसी का पौधा सूख रहा है तो क्या ये खतरे की निशानी है? जानें तुलसी बार-बार क्यों सूखती है? साथ ही जानें इससे जुड़े कुछ वास्तु टिप्स…
घर में पेड़-पौधों के होने से एक अलग तरह की पॉजिटिविटी आती है। वहीं वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर में कुछ पौधों के होने से घर से जुड़ी कई दिक्कतें दूर हो सकती हैं और इनमें से एक पौधा है तुलसी। वैसे तो तुलसी के पौधे के लिए हाई मेंटेंस की जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि फिर भी कई घरों में ये सूखने लगती है। ऐसे में कुछ लोग ज्यादा परेशान हो जाते हैं कि कहीं ये अशुभ संकेत तो नहीं है? दरअसल हरी-भरी तुलसी को हमेशा से सकारात्मकता के रूप में देखा जाता है और माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। तो चलिए जानते हैं कि वास्तुशास्त्र के हिसाब से जानते हैं कि सूखी हुई तुलसी किस बात का संकेत देती है और इसके लिए क्या उपाय किया जा सकता है?
क्यों सूख जाती है तुलसी?
वास्तु शास्त्र के हिसाब से अगर घर में तुलसी का पौधा सूखता है तो इसका साफ मतलब है कि किसी की बुरी नजर लगी है। सूखी हुई तुलसी इस बात का प्रमाण है कि घर में नेगेटिविटी की एंट्री हो चुकी है। साथ ही ये पितृ दोष के भी संकेत देता है। अगर सूखी हुई तुलसी को समय रहते घर से ना हटाया जाए तो ये घर की नेगेटिविटी को और भी बढ़ा सकते हैं। शास्त्र के हिसाब से सूखी हुई तुलसी को फेंकना भी सही नहीं है। ऐसे में आप सूखी हुई तुलसी की डंडियों को लेकर उसे रुई में लपेट लें। इसके बाद घी या फिर सरसों का तेल डालकर उसे पूजा घर में जला दें। माना जाता है कि ये घर में पॉजिटिविटी लेकर आती है।
कर लें ये उपाय
अगर आपके घर में भी तुलसी का पौधा बार-बार सूख रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि तुलसी का पौधा सही दिशा में लगा है या नहीं? शास्त्र के हिसाब से तुलसी के पौधे का सही दिशा में होना बहुत ही जरूरी है। तुलसी के पौधे को हमेशा ईशान कोण में ही लगाना चाहिए। बता दें कि शास्त्र में ईशान कोण का मतलब उत्तर-पूर्व दिशा है। इस दिशा में तुलसी का पौधा फलदायी माना जाता है। अगर गलती से भी इस पौधे को दक्षिण दिशा में रख दिया जाए तो इसका सूखना तय है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)





