वास्तु शास्त्र: थाली में खाना खाने वक्त आप तो नहीं करते हैं ये 3 गलतियां? जान लें सही दिशा और बाकी नियम

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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खाने की थाली से जुड़े भी वास्तु के कई ऐसे नियम हैं जो लोगों को नहीं मालूम होते हैं। तो आइए जानते हैं खाने के लिए सही दिशा से लेकर खाना परोसने के सही नियम को। 

वास्तु शास्त्र: थाली में खाना खाने वक्त आप तो नहीं करते हैं ये 3 गलतियां? जान लें सही दिशा और बाकी नियम

वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करने से जिंदगी में सकारात्मकता आती है। इस शास्त्र से जुड़े कुछ ऐसे नियम हैं जो हमारी जिंदगी को आसान बनाने का काम करते हैं। ना सिर्फ घर और कमरों की दिशा बल्कि हमारी रोजमर्रा की चीजों से भी जुड़े वास्तु के कुछ नियम हैं। अगर आपसे कहा जाए कि हमारे खाने की थाली का संबंध भी कहीं ना कहीं वास्तु से ही जुड़ा है तो क्या आप यकीन करेंगे? शायद नहीं या फिर आपकी सोच इस मामले में 50-50 प्रतिशत हो। बता दें कि खाने की थाली और वास्तु शास्त्र का गहरा संबंध है। खाना बनाने से लेकर खाना खाने तक वास्तु के कुछ नियम हैं, जिनको नजरअंदाज करके शायद हम अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि थाली से जुड़े वास्तु के क्या-क्या नियम हैं?

यहां पढ़ें खाने की थाली से जुड़ी वास्तु के नियम

भोजन करने की सही दिशा

सबसे पहले जान लेते हैं कि आखिर हमें भोजन किस दिशा में बैठकर खाना चाहिए? शास्त्र के हिसाब से खाना हमेशा उत्तर या फिर पूर्व दिशा की ओर बैठकर खाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के हिसाब से अगर हम पूर्व दिशा की ओर बैठकर खाना खाते हैं तो जिंदगी में सकारात्मक ऊर्जा आती है। वहीं उत्तर की ओर मुंह करके खाने से जिंदगी में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है और धन से जुड़ी समस्या भी खत्म होने लगती है। हालांकि दक्षिण की ओर मुंह करके कभी भी खाना नहीं खाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से दरिद्रता को बढ़ावा मिलता है।

कैसी होनी चाहिए खाने की थाली?

अब जानते हैं कि आखिर हमारे खाने की थाली कैसी होनी चाहिए? वास्तु शास्त्र के हिसाब से कांसे की थाली खाने के लिए सबसे सही होती है। अगर इस थाली में संभव ना हो तो साफ-सुथरी स्टील की थाली में खाना चाहिए। वहीं प्लास्टिक की थाली में खाना खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा टूटी या फिर चटकी थाली में खाना खाने से बचना चाहिए।

थाली में ऐसे परोसे खाना

खाने को परोसने से भी जुडे़ नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। शास्त्र के हिसाब से थाली में सबसे पहले चावल और रोटी रखना चाहिए। इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। खाने को हमेशा सजाकर और अच्छी तरह ही परोसना चाहिए। इससे जिंदगी में शांति और सही संतुलन बना रहता है। वहीं थाली में कभी भी एक साथ तीन रोटी नहीं परोसनी चाहिए। हमेशा 1 या फिर 2 या 4 रोटी ही थाली में एक साथ रखनी चाहिए।

इस दिशा में रखें अचार और नमक

खाने के साथ कई लोग एक्स्ट्रा नमक भी लेकर बैठते हैं और वहीं अचार खाने के स्वाद को दोगुना कर देता है। शास्त्र के हिसाब से थाली में अगर नमक रखना है तो इसे दाईं ओर ही रखना चाहिए। वहीं अचार को हमेशा बाईं ओर ही रखना सही माना जाता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
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