घर में रोजाना शंख बजाने से मिलते हैं ये 4 फायदे, इस दिशा में रखने से मिटता है वास्तु दोष
वास्तु शास्त्र के अनुसार रोजाना शंख बजाने से कई फायदे मिल सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में। साथ ही जानेंगे कि आखिर इससे वास्तु दोष कैसे दूर होता है?

हिंदू धर्म में शंख बजाना काफी पवित्र माना जाता है। किसी भी मांगलिक काम के दौरान शंख का बजना काफी शुभ होता है। वहीं ज्यादातर घरों में पूजा के समय शंख बजाने की परंपरा होती है। मान्यता है कि शंख की आवाज से घर का माहौल पॉजिटिव होता है और सारी नेगेटिव एनर्जी दूर होती है। पुराने समय से ही घर में और मंदिरों में पूजा बंजाने की परंपरा है।
माना जाता है कि जिस घर में रोज शंख बनाया जाता है, वहां पर हमेशा सुख-समृद्धि का वास होता है और हमेशा भगवान की भी कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं कि आखिर रोजाना पूजा के दौरान शंख बजाने से हमें क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं?
1. घर में आती है पॉजिटिव एनर्जी
वास्तु के अनुसार अगर घर में पूजा के दौरान रोज शंख बजाया जाए तो माहौल शांत बनता है। इससे मन शांत रहता है और एक अलग तरह का सुकून मिलता है। रोजाना शंख बजाने से घर में पॉजिटिविटी आती है। शंख की आवाज को काफी पावरफुल माना जाता है और इसकी आवाज से निकलने वाली वाइब्रेशन हर चीज को पॉजिटिव बनाती है।
2. मिलती है मां लक्ष्मी की कृपा
वास्तु और धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख का संबंध मां लक्ष्मी से भी माना जाता है। माना जाता है कि जिस घर में शंख होता है और वहां पर उसकी रोज पूजा की जाती है तो वहां धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। शंख को रोज बजाने से घर में बरकत बनी रहती है और पैसों से जुड़ी हर तरह की परेशानी भी दूर होती है। इसी वजह से पूजा के दौरान शंख बजाने की परंपरा है। मां लक्ष्मी के आशीर्वाद को पाने के लिए घर में शंख को जरूर रखना चाहिए।
3. शंख बजाने से दूर होता है वास्तु दोष
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख की ध्वनि से कई तरह के दोष दूर होते हैं। माना जाता है कि शंख बजाने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और घर में चल रही नेगेटिव एनर्जी कम होती है। इसी वजह से मंदिरों में आरती के समय शंख बजाना जरूरी माना जाता है ताकि माहौल पवित्र बना रहे और पॉजिटिव एनर्जी हर तरह हो। वास्तु के अनुसार मंदिर में ईशान कोण की ओर शंख को रखने से वास्तु दोष दूर होता है। ऐसे में शंख को हमेशा इसी दिशा में रखना चाहिए। वास्तु की भाषा में ईशान कोण को उत्तर-पूर्व दिशा कहा जाता है।
4. सेहत के लिए होता है फायदेमंद
शंख बजाना केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि हेल्थ के लिहाज से भी अच्छा माना जाता है। शंख बजाते समय सांस को कंट्रोल करना पड़ता है और इस वजह से लंग्स की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है। कई लोग इसे एक तरह की ब्रीदिंग एक्सरसाइझ भी मानते हैं।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
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