Hindi Newsधर्म न्यूज़vastu shastra ghar ke mandir me kitni murti rakhni chahiye ideal number of idols for a home mandir
घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां रखते हैं आप? भूलकर भी ना करें ये गलतियां

घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां रखते हैं आप? भूलकर भी ना करें ये गलतियां

संक्षेप:

मंदिर में वैसे तो हमें सभी देवी-देवता की मूर्तियों के दर्शन हो जाते हैं। हालांकि घर के मंदिर के लिए नियम कुछ अलग होते हैं। यहां पर सभी देवी-देवताओं की मूर्ति नहीं रखी जा सकती है। जानें मंदिर से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्य के बारे में…

Feb 11, 2026 12:12 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। लोग मंदिर जाकर मत्था टेकते हैं और अपने घर के मंदिर में भी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं। घर का ये पवित्र कोना पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसे हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मंदिर में टूटे-फूटे सामान या बेकार की चीजें नहीं रखनी चाहिए। पूजा स्थान से जुड़े कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। अक्सर लोग एक बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? आज जानेंगे इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे कि आखिर कौन सी मूर्तियों को हमें घर के पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए? मूर्तियों को लेकर सही तरीका क्या होना चाहिए।

पूजा घर में रखें सिर्फ इतनी मूर्तियां

वास्तुशास्त्र और हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में सादगी रहें तो ये अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से घर के मंदिर में बहुत ज्यादा मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर सीमित संख्या में यहां मूर्तियां रखी जाए तो मन एकाग्र रहता है और ध्यान लगाकर पूजा करना भी आसान हो जाता है। आम तौर पर यहां पर 2 से 5 मूर्तियां रखना ही सही होता है। इससे मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है और ऐसे में आसानी से साफ-सफाई भी की जा सकती है।

पूजा घर में गलती से भी ना रखें ये मूर्तियां

घर के मंदिर में शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां रखना ही शुभ माना जाता है। मंदिर कुछ देवताओं के उग्र या क्रोधित रूप घर में रखने की सलाह नहीं दी जाती है। घर के मंदिर में नटराज, शनि देव या फिर राहु-केतु उग्र या फिर क्रोधित रूप वाली मूर्तियां, मां काली की मूर्ति या फिर काल भैरव के उग्र स्वरूप को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियां शक्ति और तप का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इन्हें घर के मंदिर में रखना सही नहीं होता है। घर में आम तौर पर शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही रखनी चाहिए। इन मूर्तियों की एनर्जी से घर का वातावरण शांति रहता है और घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है।

रखें इन बातों का ध्यान

घर के मंदिर से जुड़े कुछ और भी नियम हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि मंदिर घर के ईशान कोण में ही हो। बता दें कि वास्तु शास्त्र में ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। इस दिशा को एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स माना जाता है। ऐसे में यहां पर मंदिर बनाना फलदायी होता है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिशा में सभी देवी-देवता का वास होता है। इसके अलावा ये जरूर देख लें कि मंदिर में मौजूद मूर्तियों के बीच कम से कम 1-2 इंच की दूरी जरूर हो। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर कभी भी बेडरूम या फिर वॉशरूम के आसपास ना हो। नियम के अनुसार घर का मंदिर सीढ़ियों के ठीक नीचे भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ , Aaj ka Rashifal,Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!
;;;